
कांग्रेस ने भारत सरकार के विदेश नीति को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए बातचीत में पाकिस्तान के मध्यस्थ और पहलकर्ता के रूप में उभरना भारतीय कूटनीति की असफलता को दर्शाता है। उन्होंने विदेश मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जयशंकर भारत को हुई भारी शर्मिंदगी और क्षेत्रीय कूटनीति को लगे झटके को ढकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
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बता दें कि, पश्चिम एशिया संकट को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को दलाल देश कहा था। इस बयान को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि गले लगाने वाली कूटनीति पूरी तरह फेल हो चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि एक कमजोर देश भी दलाल बनने की स्थिति में दिख रहा है, जो भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है।
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जयराम रमेश ने गुरुवार को अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “विदेश मंत्री ने कल रात कहा कि भारत कोई ब्रोकर देश नहीं है। यह अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन सच यह है कि हमारी कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की भारी विफलताओं ने एक टूटे हुए देश को ब्रोकर देश बना दिया है। यही स्वयंभू विश्वगुरु का हमारे कूटनीतिक रिकॉर्ड में एक ऐसा अनोखा योगदान है, जिसे विदेश मंत्री के कितने भी वन-लाइनर मिटा नहीं सकते।“
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कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान के काले इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वास्तव में घोर आपत्तिजनक है कि पाकिस्तान को इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। जिसने कई दशकों से भारत समेत कई देशों में आतंकवाद को प्रायोजित और संचालित किया है।
उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसकी राज्य व्यवस्था ने चार दशकों से अधिक समय तक भारत और अन्य देशों में आतंकवाद को प्रायोजित और संचालित किया और ओसामा बिन लादेन और अन्य खतरनाक वैश्विक आतंकवादियों को दशकों तक पनाह दी। अफगानिस्तान में अस्पतालों और नागरिक ठिकानों पर बेरहमी से बमबारी की और विभिन्न प्रांतों-बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य क्षेत्रों में अपने ही नागरिकों तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ युद्ध छेड़ा।
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जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका के लिए भी उपयुक्त माना जाना, प्रधानमंत्री की कूटनीति की वास्तविकता और उसके तरीके-दोनों-पर एक बेहद गंभीर आरोप है, जो बड़े-बड़े दावों और कायरता से चिह्नित रही है। याद कीजिए कि 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया था, क्योंकि डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार दुनिया को पाकिस्तान की साजिशपूर्ण भूमिका के बारे में समझाने में सफल रही थी। इसके विपरीत, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ और ज़हरीले बयानों के बाद भी हम पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में असफल रहे। उल्टा, वह और अधिक प्रासंगिक खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आया है, और 10 मई 2025 के बाद तो यह साफ हो गया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम का पसंदीदा बन चुका था।"
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गौरतलब है कि, जयराम रमेश बुधवार को भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की गले लगाने वाली कूटनीति विफल रही है। उनका कहा कि पहले जिन देशों के साथ नजदीकी दिखाई गई, उसी के बावजूद आज पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थता का मौका मिल रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल उठाया कि जब भारत ने रूस-यूक्रेन के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी, तब क्या भारत ब्रोकर देश था। उन्होंने इसे सरकार की दोहरी सोच बताया।
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