
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में न्यायिक व्यवस्था से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संभल के नए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अब आदित्य सिंह होंगे। आदित्य सिंह वही हैं, जिन्होंने सिविल जज (सीनियर डिविजन) के रूप में रहते हुए जामा मस्जिद सर्वे का आदेश दिया था। मौजूदा प्रशासनिक फैसले में उन्हें प्रमोशन देकर सीजेएम पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है, जब संभल हिंसा से जुड़ा मामला न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर लगातार चर्चा में बना हुआ है।
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संभल हिंसा मामले में जिस तत्कालीन CJM विभांशु सुधीर ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था, उनका संभल से सुल्तानपुर तबादला कर दिया गया है, लेकिन यह फैसला सिर्फ स्थानांतरण तक सीमित नहीं रहा।
चंदौसी में तैनात रहे CJM विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर भेजते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद से हटाकर सिविल जज (सीनियर डिविजन) बना दिया गया है।
यानी यह मामला स्पष्ट तौर पर डिमोशन से भी जुड़ा है, जिसे लेकर न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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यह पूरा मामला संभल में हुई हिंसा के दौरान घायल हुए युवक आलम से जुड़ा है। आलम के पिता यमन ने अदालत में याचिका दाखिल की थी।
इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए CJM विभांशु सुधीर ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
अदालत का यह आदेश संभल हिंसा में पुलिस की भूमिका तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना गया।
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CJM के आदेश के बाद संभल में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी। जिले के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि पुलिस इस आदेश के तहत मुकदमा दर्ज नहीं करेगी।
उन्होंने यह भी साफ किया था कि अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी और इसके खिलाफ अपील दायर की जाएगी।
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अब CJM विभांशु सुधीर के तबादले और डिमोशन के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि प्रशासन इसे नियमित तबादला प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।
खासतौर पर यह तथ्य कि पुलिस अधिकारियों पर मुकदमे का आदेश देने के तुरंत बाद जज को न सिर्फ हटाया गया, बल्कि निचले न्यायिक पद पर भेज दिया गया, इस घटनाक्रम को और संवेदनशील बना देता है।
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नए CJM की नियुक्ति और पुराने CJM के डिमोशन के बाद संभल हिंसा मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है या नहीं।
साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि उच्च न्यायालय इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है और प्रशासन जज के तबादले व डिमोशन को लेकर आगे क्या स्पष्टीकरण देता है।
फिलहाल, यह मामला न्यायिक स्वतंत्रता, पुलिस जवाबदेही और प्रशासनिक फैसलों के बीच एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है।
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