
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' किताब पर बयान पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है। संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका कहना था कि जब कोई पड़ोसी देश हमला करने की नीयत से सीमा पर पहुंचता है, तो उस समय देश के राजनीतिक नेतृत्व को स्पष्ट फैसला लेना चाहिए।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि उस दौरान तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (सेवानिवृत्त) यह जानना चाह रहे थे कि आगे क्या कदम उठाया जाए, लेकिन प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री निर्णय लेने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले के सामने आने के बाद उन्हें अब जनरल नरवणे की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है। राउत ने आशंका जताई कि सरकार इस मुद्दे पर भी वैसी ही प्रतिक्रिया दे सकती है, जैसी उसने सोनम वांगचुक के मामले में दी थी। उन्होंने मांग की कि पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।
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लोकसभा में सोमवार को भारी हंगामा देखने को मिला। विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए एक पत्रिका में प्रकाशित अंशों का हवाला दिया। ये अंश भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक से जुड़े बताए गए, जिसके बाद सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
राहुल गांधी ने सदन में कहा कि कारवां पत्रिका में जनरल नरवणे के संस्मरण से जुड़े कुछ अंश प्रकाशित हुए हैं, जिन्हें सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पत्रिका से केवल पांच पंक्तियां पढ़ना चाहते हैं। जैसे ही उन्होंने दोबारा बोलना शुरू किया, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण देश की आंतरिक स्थिति, नीतियों, विदेश नीति और वैश्विक हालात से जुड़ा होता है। उन्होंने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन पर देशभक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि वह केवल तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहते हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आतंकवाद से लड़ने का दावा करने वाली सरकार एक उद्धरण से डर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को कोई डर नहीं है तो उन्हें सदन में वह अंश पढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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इस किताब का नाम 'Four Stars of Destiny: An Autobiography' यानी फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी: एन ऑटोबायोग्राफी है, जिसे पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने लिखा था। बता दें, नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। यह 448 पेज की किताब है। यह जनरल नरवणे के 40 साल के सैन्य करियर की पूरी कहानी बताती है। इसमें सिक्किम में चीन से पहली मुलाकात से लेकर गलवान में चीनी सेना से सामना, LoC पर फायरिंग, पाकिस्तान के साथ सीजफायर लागू करना और आधुनिक युद्ध के लिए सेना को तैयार करने जैसे किस्से शामिल हैं।
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इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, किताब अभी अप्रकाशित है यानी इसे छापा नहीं गया है। इसे भारत में खरीदा नहीं जा सकता, हालांकि यह अमेजन पर लिस्टेड है, लेकिन उपलब्ध नहीं। यह किताब मूल रूप से जनवरी 2024 में रिलीज होने वाली थी, फिर अप्रैल 2024 में टाल दी गई। अभी मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (MoD) और इंडियन आर्मी इसकी सुरक्षा समीक्षा कर रही है, क्योंकि इसमें संवेदनशील जानकारी है। जैसे 2020 का लद्दाख स्टैंडऑफ और अग्निपथ स्कीम। पब्लिशर को एक्सट्रैक्ट्स या सॉफ्ट कॉपी सर्कुलेट न करने को कहा गया है। जनरल नरवणे ने 2025 में कहा था कि अब पब्लिशर और MoD के हाथ में है।
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2020 लद्दाख स्टैंडऑफ (चीन के साथ): 31 अगस्त 2020 की रात को पैंगोंग त्सो के साउथ बैंक के रेचिन ला पास पर चीनी PLA ने टैंक और सैनिक भेजे। भारतीय सेना की पोजीशंस पर टैंक कुछ सौ मीटर दूर थे। स्थिति 'टेंसे और ब्रेकिंग पॉइंट' के करीब थी। नॉर्दर्न कमांड चीफ लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने जनरल नरवणे को रात 8:15 बजे फोन किया। नरवणे ने तुरंत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, NSA अजीत डोभाल, CDS बिपिन रावत, और विदेश मंत्री एस जयशंकर को फोन किया और पूछा, 'मेरे ऑर्डर्स क्या हैं?'
अनपब्लिश्ड किताब में नरवणे ने लिखा कि उन्हें 'हॉट पोटैटो' थमा दिया गया, सारी जिम्मेदारी उन पर डाल दी गई। उन्होंने गहरी सांस ली, कुछ मिनट चुप बैठे और दीवार की घड़ी की टिक-टिक सुनते रहे।कोई क्लियर फायरिंग ऑर्डर नहीं आया।'टॉप से क्लियरेंस' तक फायर न करने के प्रोटोकॉल थे।
किताब में जून 2020 में हुए गलवान क्लैश का भी जिक्र है, जहां 20 साल में पहली बार PLA को 'फेटल कैजुअल्टीज' हुई।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसे नहीं भूलेंगे।
अग्निपथ स्कीम: जून 2022 में लॉन्च हुई इस योजना से आर्मी सरप्राइज हुई। नेवी और एयर फोर्स के लिए 'बोल्ट फ्रॉम द ब्लू' थी।इस योजना को लेकर आर्मी का ओरिजिनल प्रपोजल था छोटा पायलट प्रोजेक्ट, 75% रिक्रूट्स को रिटेन करना और 25% रिलीज करना। लेकिन फाइनल स्कीम में 25% ही रिटेन हुए, जबकि 75% को 4 साल बाद रिलीज करने का नियम बना।शुरुआती सैलरी 20 हजार रुपए को नरवणे ने 'अनएक्सेप्टेबल' कहा। उन्होंने लिखा, 'ट्रेंड सोल्जर जो जान दे सकता है, उसे डेली वेज लेबर से कैसे कंपेयर करें?' बाद में दाम बढ़ाकर 30 हजार रुपए कर दिए गए।
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