
दिल्ली से लेकर कोलकाता तक, बीएचयू से लेकर आईआईटी मद्रास तक और अहमदाबाद से लेकर मुंबई तक नागरिकता संशोधन कानून का विरोध हो रहा है। रविवार को जामिया और अलीगढ़ विश्वविद्यालय में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सोमवार को पूरे देश में संशोधित कानून के खिलाफ आवाजे तेज हो गईं और लोग सड़कों पर निकल आए।
इस दौरान सोमवार को जामिया इलाके में आम नागरिकों ने सड़कों पर निकलकर संशोधित कानून का विरोध किया और नारेबाजी की। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस विरोध के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के पुतले भी जलाए गए।
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रविवार को जामिया में शुरु हुआ विरोध प्रदर्शन देर रात दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर समाप्त हुआ था। राजनीतिक हलकों में इस विरोध प्रदर्शन की गूंज साफ सुनाई दे रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कोलकाता में विशाल रैली की तो देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इंडिया गेट पर सैकड़ों छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ धरना दिया।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में पुलिस बर्बरता का मामला पहुंचा है, जिस पर आज उच्चतम न्यायालय सुनवाई करेगा। हालांकि याचिकाओं में तुरंत सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने यह कहकर सुनवाई मंगलवार तक के लिए टाल दी कि जब तक उपद्रव नहीं रुकता सुनवाई करना संभव नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि वे छात्र हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि वे कानून को अपने हाथ में ले लेंगे।
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उधर दिल्ली की जामिया विश्विविद्यालय की कुलपति नजमा अख्तर ने पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई में 200 से ज्यादा छात्र-छात्राएं जख्मी हुए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जिस तरह कैंपस में घुसकर तोड़फोड़ की और छात्रों-शिक्षकों पर हमला किया वह निंदनीय है।
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