
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में मेयर पद को लेकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना और बीजेपी में ठन गई है। शिंदे सेना ने बीएमसी में ढ़ाई-ढ़ाई साल टर्म में मेयर पद की मांग की है। इससे बीजेपी में नाराजगी है। हालांकि, शिंदे सेना ने मेयर पद पाने के लिए एक और भावनात्मक खेल खेला है। उसने यह भी मांग की है कि शिवसेना के जन्मदाता बाल ठाकरे के 23 जनवरी को जन्मशताब्दी पर शिवसेना (शिंदे गुट) का मेयर होना चाहिए। शिंदे सेना ने बड़ी चालाकी से यह मांग की है। क्योंकि, शुक्रवार को बीएमसी चुनाव में ठाकरे सत्ता खत्म करने के बाद बीजेपी नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति की जीत को बाल ठाकरे को समर्पित करने की घोषणा की। शिंदे सेना प्रवक्ता शायना एनसी ने बीएमसी में महिला मेयर की मांग की है। मुख्यमंत्री फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने भी बीएमसी में महिला मेयर हो ऐसी इच्छा जताई है।
शिंदे सेना की ओर से बीएमसी में ढ़ाई साल के टर्म पर मेयर पद की मांग करने के बाद ठाणे में 28 सीटों पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी ने आक्रामक रुख कर लिया है। बीजेपी विधायक संजय केलकर ने प्रेस कांफ्रेंस करके स्पष्ट किया है कि अगर हमें सम्मान नहीं मिलेगा तो हम विपक्ष की कुर्सी पर बैठने के लिए तैयार हैं। दबाव की रणनीति अपनाते हुए केलकर ने यह भी स्पष्ट किया है कि बीजेपी को डिप्टी मेयर सहित अन्य समितियों में हिस्सा चाहिए।
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मेयर पद को लेकर शिंदे सेना और बीजेपी के बीच स्थिति अच्छी नहीं है। शिंदे सेना में डर है कि मुंबई में उनके चुने हुए नगरसेवकों को तोड़कर बीजेपी कोई नया खेल खेल सकती है। इसलिए शिंदे सेना के नगरसेवकों को बांद्रा स्थित एक पांच सितारा होटल में रखा गया है। चर्चा तो यह भी है कि बीजेपी की ओर से उद्धव ठाकरे गुट के चुने हुए नगरसेवकों को भी तोड़ा जा सकता है। बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने 89 और शिंदे सेना 29 सीटों पर जीत हासिल की है। 227 सीटों वाले बीएमसी में बहुमत के जादुई आंकड़े 114 से ज्यादा महायुति को 118 नगरसेवक हैं। बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि 4 सीटें ज्यादा होने से बीजेपी को शिंदे सेना से हमेशा खतरा बना रहेगा। इसलिए बीजेपी ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिससे शिंदे सेना को दबाकर रखा जा सके। ठाणे में शिंदे सेना को डर नहीं है। क्योंकि, उसके 75 नगरसेवक हैं जो बहुमत के जादुई आंकड़े से ज्यादा है। ऐसे में सत्ता में अगर बीजेपी उसके साथ नहीं भी रहेगी तो शिंदे सेना को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन बीजेपी सत्ता में शामिल होने के लिए दबाव की राजनीति कर रही है। इधर मेयर पद को लेकर शिंदे सेना और बीजेपी के बीच रस्साकशी हो रही है उसे देखते हुए फडणवीस ने शनिवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा है कि बीएमसी में महायुति का मेयर होगा। मेयर कौन होगा, कितने साल के लिए होगा यह सब मैं और एकनाथ शिंदे मिलकर तय करेंगे।
वहीं, मेयर चुनने की प्रक्रिया की बात की जाए तो यह सब आरक्षण की लॉटरी सिस्टम से ही तय किया जाएगा। इसमें एक सप्ताह का समय लग सकता है। इस बीच 17 से 24 जनवरी तक स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक मंच के वार्षिक बैठक में फडणवीस शामिल होंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि वहां से लौटने के बाद मेयर पद के लिए फार्मूले पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
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