
SIR और CEC के खिलाफ विपक्षी मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई।
जंतर-मंतर और निर्वाचन सदन के आसपास भारी पुलिस तैनाती और बैरिकेडिंग की गई।
फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग और सवालों के घेरे में।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच आज प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर और चुनाव आयोग मुख्यालय यानी निर्वाचन सदन के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और इलाके में आवाजाही पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा इंतजाम एहतियाती तौर पर किए गए हैं, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोका जा सके।
INDIA ब्लॉक के निर्वाचन सदन तक प्रस्तावित मार्च को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष इसी बात का जवाब मांग रहा है कि ये बदलाव किसने किए। मसूद ने आरोप लगाया कि उनकी लड़ाई चुनाव आयोग से है, लेकिन जवाब बीजेपी की ओर से दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त को पद से हटना चाहिए और विपक्ष इस मुद्दे पर मार्च करेगा।
इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। SIR के दौरान नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए इसी फॉर्म का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार पर अपने हमले तेज कर दिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से फॉर्म-6 में बदलाव किया। वहीं, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को भ्रामक बताया।
सोमवार को दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों को हिरासत में लिया। ये लोग 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कथित झड़प के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे केवल एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे, लेकिन उनके साथ गलत व्यवहार किया गया। कुछ लोगों ने दावा किया कि वे रविवार शाम से सोमवार सुबह तक थाने के बाहर बैठे रहे और शिकायत की स्थिति जानने की कोशिश कर रहे लोगों को हिरासत में लिया गया। महिलाओं और दिव्यांग लोगों के साथ बल प्रयोग किए जाने का आरोप भी लगाया गया।
3 अक्टूबर की घटना को लेकर तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शिकायतें मिलने के बाद मामले को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच, कमला मार्केट को भेज दिया गया है। पुलिस ने कहा कि घटना के दौरान इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी हुई थी और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस ने AISA के कई सदस्यों को भी हिरासत में लिया। जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल के भी मौजूद होने और आगे बढ़ने का प्रयास करने की बात सामने आई। मंगलवार के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। वहीं, विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज समूहों की ओर से SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
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