
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी वराले की पीठ ने कहा कि वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट ठीक नहीं है और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम नटराज को इस मामले में निर्देश लेने चाहिए। मामले में गुरुवार को भी अदालत में दलीलें पेश की जाएंगी।
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सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि हिरासत का आदेश 26 सितंबर 2025 को पारित हुआ था, जो लगभग पांच महीने पुराना है। कोर्ट ने कहा, "हिरासत में व्यक्ति की सेहत निश्चित रूप से अच्छी नहीं है। पहले देखी गई रिपोर्ट से भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक दिखती है। उम्र से जुड़े अन्य कारक भी हैं। क्या सरकार इस पर दोबारा विचार कर सकती है?"
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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) के.एम. नटराजन ने एनएसए को एक विशेष कानून बताते हुए कहा कि यह निवारक हिरासत है, न कि सजा देने वाली। इसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना या राज्य की सुरक्षा को खतरे से बचाना है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अथॉरिटी के विवेक पर निर्भर है। मजिस्ट्रेट ने सबूतों के आधार पर ही आदेश दिया होगा।
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एएसजी ने बताया कि एडवाइजरी बोर्ड जोधपुर गया था, जहां उसने वांगचुक से बातचीत की और उनका प्रतिनिधित्व भी लिया। सभी पहलुओं की जांच के बाद बोर्ड ने रिपोर्ट दी है। अगर बोर्ड की राय नेगेटिव भी हो तो भी सरकार के पास एनएसए रद्द करने की शक्ति है। एएसजी ने कहा कि वांगचुक पिछले साल लेह में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और 161 लोग घायल हुए। उन्होंने कहा, “अंतत: उनके भड़काऊ भाषण, उकसावे के कारण यह सब हुआ। व्यक्ति का सक्रिय रूप से भाग लेना आवश्यक नहीं होता, व्यक्तियों के समूह को प्रभावित करना ही पर्याप्त होता है।”
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कोर्ट ने एएसजी के विवेक पर सवाल उठाते हुए कहा कि विवेक कानून के दायरे में होना चाहिए। अगर कोई सिर्फ यह कह दे कि "मुझे संभावित खतरा लगता है," तो केवल इतना आधार हिरासत के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत यह हिरासत आदेश की अपील नहीं है, बल्कि आधार और सामग्री का राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंध जांचा जाता है। याचिका में गीतांजलि ने हिरासत को मनमाना और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। वहीं, केंद्र ने हिरासत को उचित ठहराया, लेकिन कोर्ट ने सेहत के आधार पर पुनर्विचार की अपील की। सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह में हिंसक प्रदर्शनों के बाद एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।
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