
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक कॉज-लिस्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच इन मामलों पर सुनवाई करेगी। याचिकाओं में दान और चढ़ावे के प्रबंधन की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने सहित कई अहम निर्देश देने की मांग की गई है।
सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर रिट याचिका, अजय कुमार राय और अन्य की ओर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व अन्य के खिलाफ दायर आपराधिक रिट याचिका तथा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद सुधाकर सिंह की अलग याचिका शामिल है। इससे पहले जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने गोस्वामी की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। उस समय याचिकाकर्ता ने आरोपों को "बहुत गंभीर" बताते हुए मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने की मांग की थी। हालांकि, पीठ ने मामले की तात्कालिकता पर सवाल उठाते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद इसे सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।
गोस्वामी की याचिका में मंदिर में मिले दान और चढ़ावे से जुड़े सभी रिकॉर्ड, साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग को तत्काल सुरक्षित रखने के निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता लाने, चल रही विशेष जांच दल (SIT) की जांच की सीलबंद स्थिति रिपोर्ट पेश कराने और ट्रस्ट की स्थापना के बाद से प्राप्त सभी दान, चढ़ावे तथा मूल्यवान वस्तुओं का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक मंदिर में देवता को चढ़ाया गया चढ़ावा "पवित्र न्यास संपत्ति" है, जो एक कानूनी इकाई के रूप में देवता में निहित होती है। ऐसे में इसके प्रबंधन से जुड़े न्यासी पारदर्शिता, जवाबदेही और संरक्षण के दायित्वों से बंधे होते हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रीय महत्व के मंदिरों में मिलने वाले दान और चढ़ावे के पारदर्शी प्रबंधन के लिए न्यूनतम संवैधानिक सुरक्षा उपाय तय करने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि सार्वजनिक रिपोर्टों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की जांच में कथित तौर पर मंदिर के दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं, गबन और वित्तीय कुप्रबंधन के संकेत मिले हैं।
वहीं, आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी याचिका में चल रही जांच को सुप्रीम कोर्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की है। उन्होंने ट्रस्ट के धर्मनिरपेक्ष वित्तीय मामलों की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों की अदालत की निगरानी वाली अस्थायी समिति गठित करने, सभी वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, जांच पूरी होने तक बड़े वित्तीय फैसलों पर रोक लगाने, व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने और ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण तथा दान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का भी अनुरोध किया है।