
पत्रकार विनोद दुआ की विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शिमला पुलिस द्वारा विनोद दुआ को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के तहत जारी किए गए निर्देश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा कि जांच अधिकारी (एचपी पुलिस) दुआ से कानून के अनुसार, उनसे पूछताछ करने से 24 घंटे पूर्व दुआ को सूचना देंगे। कोर्ट ने हिमाचल सरकार से जांच की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस मोहन एम शांतनगौदर की एक पीठ ने केंद्र, हिमाचल प्रदेश सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई में होगी।
Published: 14 Jun 2020, 12:20 PM IST
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि विनोद दुआ को सुनवाई की अगली तारीख यानी 6 जुलाई तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है, साथ ही उन्हें राजद्रोह के मामले में जांच में शामिल होने के लिए कहा। पीठ ने विनोद दुआ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह की ओर से की गई दलीलों के बावजूद दुआ के खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सिंह ने कहा कि एफआईआर सरकार के प्रति अनुचित विचारों को प्रसारित करने के लिए एक ‘उत्पीड़न’ है। दुआ के वकील विकास सिंह ने कहा कि शिकायत दर्ज करने वाले बीजेपी नेता सत्तारूढ़ पार्टी के हाथों की कठपुतली हैं। इस पर पीठ ने उन्हें टोका कि ऐसे विशेषणों का उपयोग न करें। इसकी आवश्यकता नहीं है।
Published: 14 Jun 2020, 12:20 PM IST
बता दें कि शिमला पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अजय श्याम द्वारा विनोद दुआ के खिलाफ लगाए गए राजद्रोह के आरोप में उन्हें तलब किया था। इसके अलावा भी विनोद दुआ के खिलाफ कई जगहों पर केस दर्ज कराए गए हैं। उनके ऊपर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है।
Published: 14 Jun 2020, 12:20 PM IST
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Published: 14 Jun 2020, 12:20 PM IST