
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक खुला पत्र लिखकर जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित द्वारा जाति पर कथित विवादास्पद टिप्पणियों के संबंध में केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट करने की मांग की।
शिक्षक संघ ने कहा कि व्यापक रूप से प्रसारित एक पॉडकास्ट में कुलपति की ये टिप्पणियां ‘चौंकाने वाली’ थीं। शिक्षक संघ ने शिक्षा मंत्रालय से इस पर प्रतिक्रिया देने की मांग की।
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शिक्षक संघ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में दलील दी कि इन टिप्पणियों से यह धारणा बनती है कि केंद्र सरकार उनके विचारों का समर्थन करती है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि कुलपति पंडित ने अपनी नियुक्ति पर चर्चा करते समय सत्तारूढ़ दल के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र किया था।
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पत्र के मुताबिक, “शिक्षक संघ ने माननीय मंत्री को एक सितंबर, 22 सितंबर और 21 नवंबर, 2025 को पत्र लिखकर यह मांग उठाई थी। हमने यह भी उजागर किया था कि प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के नेतृत्व में जेएनयू के कुप्रशासन का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक और लैंगिक न्याय का हनन व उल्लंघन था, जो सत्ता के केंद्रीकरण और मनमानी नीति से चिह्नित था।”
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शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्रालय की चुप्पी की भी आलोचना की और इसकी तुलना 26 फरवरी को जेएनयू विद्यार्थियों द्वारा मंत्रालय तक मार्च करने के प्रयास पर पुलिस की गई कार्रवाई से की।
शिक्षकों के संगठन के अनुसार, प्रतिक्रिया न मिलने से उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को दूर करने के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठते हैं।
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शिक्षक संघ ने पत्र में आरक्षित पदों के लिए संकाय भर्ती में ‘कोई उपयुक्त नहीं पाया गया’ प्रावधान के कथित दुरुपयोग, पदोन्नति में ‘भेदभाव’ और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति श्रेणियों से महिलाओं और विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व में कथित कमी पर चिंता व्यक्त की।
शिक्षक संघ ने दावा किया कि पॉडकास्ट में कुलपति की टिप्पणियां न केवल उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण के अनुरूप थीं बल्कि इसमें एक ‘नया और चिंताजनक आयाम’ भी जोड़ दिया।
शिक्षक संघ ने कहा कि कुलपति पंडित ने जातिगत भेदभाव को कथित तौर पर ‘स्थायी पीड़ित मानसिकता’ से जुड़ी ‘मनगढ़ंत वास्तविकता’ बताया।
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