
कांग्रेस ने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों के बीच बातचीत के मद्देनजर शनिवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि ‘हाउडी मोदी’ एवं ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने के बाद भी पाकिस्तान को पश्चिम एशिया संकट के समाधान की दिशा में भूमिका निभाने का अवसर कैसे मिल गया।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को विश्व मंच पर अलग-थलग करने में विफल रही, जबकि 2008 के मुंबई हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया था।
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जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "अमेरिका-ईरान की बैठक आज इस्लामाबाद में शुरू हो रही है। भारत समेत पूरी दुनिया उम्मीद कर रही है कि यह दोनों देशों के बीच एक टिकाऊ शांति प्रक्रिया की शुरुआत हो, जो इजराइल की लगातार आक्रामकता से पटरी से नहीं उतरे।"
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "स्वयंभू विश्वगुरु की महिमा के ‘सार और शैली’ के बारे में गंभीर प्रश्न उठते हैं। अप्रैल 2025 के नृशंस पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए भारत द्वारा की गई राजनयिक प्रतिबद्धता के बावजूद पाकिस्तान अपने लिए एक नई भूमिका बनाने में कैसे कामयाब रहा है? यह विफलता विशेष रूप से नुकसानदेह है क्योंकि नवंबर 2008 में मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने बहुत प्रभावी ढंग से पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया था।’’
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उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी और उनके 'चीयरलीडर्स' के नमस्ते ट्रंप, हाउडी मोदी और फिर "एक बार ट्रंप सरकार " जैसे अभियानों के बाद भी भारत ने अमेरिका को पाकिस्तान को यह नई भूमिका कैसे देने दी?
‘हाउडी मोदी’ 22 सितंबर 2019 को अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित एक कार्यक्रम था जिसे प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप ने संबोधित किया था।
'नमस्ते ट्रंप' 24 फरवरी, 2020 को अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप का स्वागत किया था।
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कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, "भारत भी बहुत स्पष्ट रूप से एकतरफ़ा व्यापार समझौते पर सहमत हुआ और फिर भी मोदी सरकार अमेरिका के साथ किसी भी तरह का लाभ उठाने में विफल रही।"
उन्होंने प्रश्न किया कि ‘ब्रिक्स प्लस’ के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में भारत ने कोई शांति या मध्यस्थता पहल क्यों नहीं शुरू की, खासकर जब ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ब्रिक्स प्लस के सदस्य हैं?
उन्होंने यह पूछा कि पिछले 18 महीनों में चीन के सामने अपने सुविचारित समर्पण से भारत को क्या हासिल हुआ है, विशेष रूप से जब चीन ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के प्रति पाकिस्तान की प्रतिक्रिया में सहयोग किया था?
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में शांति शीघ्र लौटनी चाहिए। होर्मुज जलडमरूमध्य को एक बार फिर उसी स्थिति में वापस आना चाहिए जो 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी-इजराइल हमले शुरू होने से पहले थी।’’
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पीटीआई के इनपुट के साथ
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