
संसद के मौजूदा सत्र के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और विपक्षी सांसदों को बोलने का अवसर न मिलने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार पर संसद को ठीक से न चलने देने और अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया है।
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सपा की सांसद डिंपल यादव ने कहा, "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज जिस तरह से संसद में विपक्ष के नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है। अगर विपक्ष चाहता है कि अमेरिका के साथ जो डील हुई है उस पर बात होनी चाहिए। कृषि और डेयरी उत्पाद का आयात आप जीरो टैरिफ पर कर रहे हैं, आपने ऐसा कदम क्यों उठाया है? अगर हम रूस से सस्ता पेट्रोल ले रहे थे, तो वह क्यों बंद हो रहा है?"
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कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, "हम काम करने के लिए तैयार हैं लेकिन यह उन पर निर्भर करता है। वे नहीं चाहते कि सदन चले। वे सदन के हर सदस्य को सस्पेंड कर सकते हैं।"
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा, "जिस तरीके से अमेरिका से डील हुई है, उसपर वो चर्चा नहीं करना चाहते। सदन के माध्यम से ही तो देश जानेगा कि डील में क्या हुआ है। जवाब कौन देगा? हमें लोकतंत्र ने एक ही जगह दी है और वो है संसद, तो हम संसद में ही यह सवाल पूछ सकते हैं लेकिन उनके पास जवाब नहीं है, वो चर्चा से भाग रहे हैं।"
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पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की किताब पर आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, "लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जो चिट्ठी में लिखा, क्या वो हकीकत नहीं है? क्या वो चिंता का विषय नहीं होना चाहिए था? हमेशा तो वो सरकार में नहीं रहेंगे, लेकिन अगर व्यवस्थाएं बिगड़ जाती हैं तो उनको संभालने में सदियां लग जाती हैं।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी हर समय ड्रामा करते हैं। इसलिए, अगर कोई और ऐसा कर रहा है, तो पीएम मोदी को इतनी जलन महसूस नहीं होनी चाहिए कि उनका ध्यान बंट रहा है।"
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टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने एसआईआर को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "एसआईआर की शुरुआत से ही हमारी नेता ममता बनर्जी स्थिति पर करीब से नजर रख रही हैं। उन्हें इस बात की सीधी जानकारी है कि चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को कैसे संभाला है।"
टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने कहा, "बंगाल की मुख्यमंत्री लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। प्रेस मीट में उन्होंने साफ कहा था कि एसआईआर पहले भी किया गया है और किया जा सकता है, लेकिन जिस तरह से भारत का चुनाव आयोग यह एसआईआर कर रहा है, उससे नागरिकों के साथ अन्याय और उत्पीड़न हो रहा है।"
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