
कांग्रेस ने बुधवार को सवाल किया कि शिक्षा मंत्रालय की ‘‘अक्षमता और भ्रष्टाचार’’ के सबूत सामने आने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी धर्मेंद्र प्रधान को क्यों बचा रहे हैं और किसके संरक्षण के चलते यह सब हो रहा है ?
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के स्तर पर जवाबदेही का स्पष्ट अभाव है।
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रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों को भले ही स्थानांतरित कर दिया गया हो, लेकिन मंत्री प्रधान पद पर बने रहने के लिए बेशर्मी से एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, जबकि उनके मंत्रालय की अक्षमता और भ्रष्टाचार के सबूत सामने आ चुके हैं।’’
उनके मुताबिक, खबरों से पता चला है कि दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा संबंधी संसदीय समिति के समक्ष सीबीएसई के अधिकारी अपनी ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवा के अनुबंध के संबंध में उठाए गए सवालों का जवाब नहीं दे सके।
कांग्रेस नेता का कहना है कि यह सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय के उच्चतम स्तर पर जवाबदेही का स्पष्ट अभाव है।
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उन्होंने एक अंग्रेजी दैनिक की खबर का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘सीबीएसई न केवल ओएसएम प्रणाली को आगे के लिए टालने की सलाह पर ध्यान देने में विफल रही, बल्कि प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए कई विशिष्ट मुद्दों को हल करने में भी विफल रही।’’
रमेश ने कहा, ‘‘मंत्री प्रधान एक भ्रष्ट, अक्षम और संवेदनहीन शिक्षा मंत्रालय चलाते हैं। अब एक सर्वेक्षण से भी पता चलता है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के मतदाता मंत्री प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं।’’
उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें बचाने पर क्यों अड़े हुए हैं तथा किसके संरक्षण ने अब तक उनका पद पर बने रहना सुनिश्चित किया है?
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पीटीआई के इनपुट के साथ
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