
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शनिवार (11 अप्रैल) को पहले दौर की बातचीत हुई। इस दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से लेकर लेबनान में सीजफायर तक कई मसलों पर बात हुई। हालांकि फिलहाल किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी है। ईरान ने बातचीत की शुरुआत में ही अमेरिका के सामने चार शर्तें रख दी थीं। पहले दौर की बात खत्म होने के बाद दोनों देशों के डेलीगेशन ने एक-दूसरे को मुख्य मुद्दों को लिखित में एक-दूसरे को सौंपा। अब आज (रविवार को) फिर से बातचीत जारी रह सकती है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में बातचीत में शामिल है। इस प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल से सीधी मुलाकात की। यह दोनों देशों के लिए एक अहम पल था। आमतौर पर ये दोनों देश मध्यस्थों के जरिए ही उच्च स्तरीय बातचीत करते रहे हैं। ईरान मीडिया की मानें तो बातचीत का पहला चरण पूरा हो चुका है। इसमें अधिकारियों ने अहम मुद्दों की लिखित रूपरेखा तैयार कर एक दूसरे को सौंपी है।
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मीडिया खबरों के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच लेबनान के मसले पर भी बातचीत हुई। ईरान चाहता है कि लेबनान में भी सीजफायर लागू हो। उसने अमेरिका से इजरायल पर दबाव बनाकर लेबनान पर हमले रोकने के लिए कहा है। हालांकि फिलहाल इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं हुई है। ध्यान रहे कि लेबनान में इजरायल का जारी सैन्य अभियान शांति की कोशिशों में रोड़ा बन रहा है। ऐसे में इजरायल और लेबनान के राजनयिकों के अगले हफ्ते मुलाकात करने की योजना है। फिलहाल लेबनान के पीएम ने अमेरिका का अपना दौरा टाल दिया है।
ईरान की तरफ से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ की अगुवाई में ईरानी टीम ने बातचीत में हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरुआती दौर में बातचीत के दौरान माहौल थोड़ा तनावपूर्ण रहा। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी जहाजों पर हमले की धमकी दी और साथ ही अपने फ्रीज़ एसेट्स खोलने की मांग दोहराई। इस्लामाबाद में हुई बातचीत में तनाव था, लेकिन दोनों पक्षों ने संकेत दिए हैं कि वे आगे भी बातचीत जारी रखेंगे। पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि इससे स्थायी शांति की दिशा में रास्ता निकलेगा।
ईरान ने होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' को मानने से इनकार कर दिया है।
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ध्यान रहे कि इस्लामाबाद वार्ता शुरु होने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि डील हो या न हो, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि अमेरिका जीत चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है और वहां जहाजों की आवाजाही को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस रास्ते को खुला रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि वॉशिंगटन मदद का हाथ बढ़ाने को तैयार है, लेकिन उन्होंने तेहरान को चेतावनी भी दी है कि वह उनके साथ 'खेलने' की कोशिश न करे।
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