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वोटर लिस्ट विवाद: कांग्रेस बोली- टुकड़ों में उठाए गए कदमों से नहीं सुधरेगा चुनाव आयोग का फेलियर

जयराम रमेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से शनिवार को जारी प्रेस नोट की असलियत सामने आ चुकी है और यह ‘‘नुकसान की भरपाई की बेताब कोशिश है, जो कुछ भी स्पष्ट नहीं करती और सब कुछ छिपाती है।’

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

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कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए कहा कि एसआईआर से जुड़े आयोग के प्रस्तावित कदम इस बात को स्वीकार करने के समान हैं कि यह कवायद ‘‘बुरी तरह विफल’’ रही है। पार्टी ने कहा कि हटाए गए या जोखिम वाले मतदाताओं के लिए ‘‘टुकड़ों में’’ उठाए गए कदम बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किए जाने की समस्या को दूर करने में बहुत कम मदद करेंगे।

कांग्रेस महासचिव (संचार) प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से शनिवार को जारी प्रेस नोट की असलियत सामने आ चुकी है और यह ‘‘नुकसान की भरपाई की बेताब कोशिश है, जो कुछ भी स्पष्ट नहीं करती और सब कुछ छिपाती है।’’

जयारम रमेश ने निर्वाचन आयोग के इस प्रेस नोट को ‘‘पूरी तरह निरर्थक’’ बताते हुए उसके खिलाफ ‘‘एक और करारा जवाब’’ जारी किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर प्रस्तावित कदम इस बात की स्वीकारोक्ति हैं कि यह कवायद ‘‘विफल’’ रही है।

जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए अपने बयान में कहा, ‘हटाए गए या हटाए जाने के जोखिम वाले मतदाताओं के लिए टुकड़ों में किए गए ये उपाय बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किए जाने की समस्या को दूर करने में बहुत कम मदद करेंगे। 5.43 करोड़ मतदाता जिनके नाम हटाए जाने का खतरा है, उनके घर अब बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) जाएंगे। ऐसा घर-घर जाकर गणना के चरण के दौरान ही किया जाना था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि असल में ये दौरे बहुत कम और कभी-कभार ही हुए थे। ऐसे दौरों के दूसरे दौर का वादा करने का क्या मतलब है, जिनके होने की संभावना ही नहीं है? जिस प्रक्रिया को एक बार ठीक से नहीं किया गया, उसे दोहराने के तर्क पर जरूर विचार किया जाना चाहिए।’’

कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि एसआईआर प्रक्रिया का क्या औचित्य है, जो ‘‘सार्वजनिक संसाधनों की भारी बर्बादी’’ और हर नागरिक के लिए परेशानी का कारण बन गई है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘एसआईआर के तीनों चरण में अब तक हटाए गए करीब 14 करोड़ मतदाताओं के लिए निर्वाचन आयोग का जवाब है कि उन्हें अब अपने नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के पास नए सिरे से आवेदन करना होगा। पहले बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करो और फिर मतदाताओं से खुद को दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए कहो।’’

उन्होंने कहा कि हाशिये पर मौजूद मतदाताओं के नाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ पहुंचाने के लिए लक्षित तरीके से हटाए जाने के व्यापक सबूत हैं और निर्वाचन आयोग ने इस आरोप का कोई जवाब नहीं दिया है।

जयराम रमेश ने कहा, ‘‘मतदाता सूची तैयार करने में ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर की केंद्रीय भूमिका, उसके द्वारा पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और ईआरओ के अधिकारों को अवैध रूप से दरकिनार किए जाने के आरोपों से इनकार नहीं किया गया है। इन मुद्दों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम प्रस्तावित नहीं किया गया है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने यह प्रमाणित करने के लिए एक समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है कि सॉफ्टवेयर ‘‘अधिनियमों और नियमों के अनुरूप’’ है। उनके मुताबिक, यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि एसआईआर के दौरान पूरे देश में इस्तेमाल किए जाने के बाद इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।

जयराम रमेश ने कहा, ‘‘हमारे पास स्पष्ट सबूत हैं कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ईसीआईनेट का इस्तेमाल किया गया और ईआरओ के फैसलों को दरकिनार किया गया, जो गैरकानूनी है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि वह गोवा में इस मुद्दे का समाधान कर रहा है, जहां यह मामला सामने आया। लेकिन पश्चिम बंगाल का क्या, जहां यही काम कहीं बड़े पैमाने पर हुआ?’’

उन्होंने सवाल किया कि उन अन्य सभी राज्यों का क्या होगा, जहां पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ईआरओ के फैसलों को दरकिनार किया गया हो।

कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने अब तक स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा है कि मतदाता सूची पर अंतिम अधिकार ईआरओ का ही होगा, जैसा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में निर्धारित है।

कांग्रेस नेता की ये टिप्पणियां ऐसे वक्त आई हैं, जब एक दिन पहले निर्वाचन आयोग ने कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से जारी किए गए थे और मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है।

रमेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि ईसीआईनेट का संचालन कौन कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची तैयार करने में एआई के व्यापक इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता की कमी चिंताजनक है।

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