
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद शनिवार को नई वोटर लिस्ट प्रकाशित की। इस सूची के मुताबिक राज्य में अब कुल मतदाता 7,04,59,284 हैं। फाइनल वोटर लिस्ट से और 546,053 वोटर हटा दिए गए हैं, जिससे कुल 61 लाख से अधिक नाम कट गए हैं।
पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा, "ड्राफ्ट लिस्ट के बाद फॉर्म छह और सात भी आए...ड्राफ्ट लिस्ट के बाद कुछ नाम जोड़े गए हैं, कुछ घटाए भी गए हैं। 16 दिसंबर को ड्राफ्ट लिस्ट के समय 7,08,16,630 वोटर थे। आज का डेटा 7,04,59,284 है...लगभग 60,06,675 नाम फैसले में चले गए। जज इस पर काम कर रहे हैं।"
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अग्रवाल ने बताया कि फॉर्म-7 के माध्यम से 5.46 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए और फॉर्म-6 और फॉर्म-6ए के माध्यम से 1.82 लाख से अधिक मतदाताओं का नाम शामिल किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से अधिक गणना प्रपत्र प्राप्त नहीं हुए, जिनमें मृत, स्थानांतरित और दोहराव वाले मतदाताओं के मामले शामिल हैं।’’ अग्रवाल ने यह भी कहा कि 60 लाख से अधिक मतदाता अभी भी ‘‘विचाराधीन’’ श्रेणी में हैं, लेकिन उन्हें एसआईआर के बाद की मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार की गई है।
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नई वोटर लिस्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में नए सिरे से राजनीतिक हलचल पैदा कर दी, जहां 47,000 से अधिक नाम हटाए गए हैं और 14,000 से अधिक नामों को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया। दक्षिण कोलकाता का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र, जिसे व्यापक रूप से बनर्जी का गढ़ माना जाता है, में पिछले साल चार नवंबर को एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने पर 2,06,295 मतदाता थे। पिछले साल 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा सूची में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 44,786 नामों को हटाए जाने की जानकारी दी गई थी।
शनिवार को जारी अंतिम सूची में 2,324 और नाम हटा दिए गए, जिससे हटाए गए नामों की कुल संख्या 47,094 हो गई। यह संख्या 2021 के भवानीपुर उपचुनाव में बनर्जी द्वारा हासिल किए गए 58,000 से अधिक वोटों के अंतर से लगभग 11,000 कम है। हटाए गए नामों के अलावा, 14,154 मतदाताओं को ‘‘विचाराधीन’’ श्रेणी में रखा गया है, जिन पर अंतिम निर्णय दस्तावेज सत्यापन पर निर्भर है। यदि अंततः इन नामों को सूची से हटा दिया जाता है, तो निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं की कुल संख्या में काफी कमी आ सकती है। इस घटनाक्रम ने विधानसभा चुनाव से पहले तीव्र अटकलों को जन्म दे दिया है।
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आयोग के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारी खुद जाकर मतदाता नामावली फॉर्म वितरित और संग्रहित करते रहे। इससे मृतक, स्थायी रूप से बाहर गए मतदाता और डुप्लीकेट नाम को हटाने में मदद मिली। संशोधन प्रक्रिया से पहले 27 अक्टूबर 2025 तक पश्चिम बंगाल में कुल 7,66,37,529 मतदाता थे, जिनमें पुरुष 3,89,03,865, महिला 3,77,31,887 और थर्ड जेंडर के 1,777 मतदाता शामिल थे। हालांकि एसआईआर की प्रक्रिया में 58,20,899 फॉर्म प्राप्त नहीं हुए, जिनमें मृतक 24,16,852, अनुपस्थित 12,20,039 समेत अन्य शामिल हैं।
आयोग के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 के ड्राफ्ट प्रकाशन के अनुसार, मतदाताओं की संख्या घटकर 7,08,16,630 हो गई। इसमें पुरुष मतदाता 3,61,99,391, महिला 3,46,15,837 और तीसरे लिंग के 1,402 मतदाता शामिल हैं। साथ ही 85 वर्ष से अधिक उम्र के वोटर 4,09,462, विदेश में रहने वाले मतदाता 85 और दिव्यांग मतदाता 4,60,479 हैं।
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इस दौरान फॉर्म-6 और फॉर्म-6ए (नए मतदाता और विदेश में रहने वाले मतदाताओं के लिए) के माध्यम से कुल 1,82,036 मतदाताओं को जोड़ा गया, जिसमें पुरुष 89,445, महिला 92,583 और थर्ड जेंडर के 8 मतदाता शामिल थे। वहीं, फॉर्म-8 (राज्य के भीतर स्थानांतरण के लिए) से 6,671 मतदाता जोड़े गए। फॉर्म-7 (हटाने के लिए) के माध्यम से कुल 5,46,053 मतदाता सूची से हटाए गए, जिसमें पुरुष 2,68,147, महिला 2,77,877 और थर्ड जेंडर के 29 मतदाता शामिल थे।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम सूची में कुल मतदाता 7,04,59,284 हैं, जिनमें पुरुष 3,60,22,642, महिला 3,44,35,260 और तीसरे लिंग के 1,382 मतदाता शामिल हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों द्वारा लगभग 60 लाख मतदाताओं के पहचान दस्तावेजों की न्यायिक जांच चल रही है, जबकि 61,78,245 लोगों के नाम हटाए गए हैं।
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