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झारखंडः आखिर हेमंत सोरेन से पीएम मोदी क्यों नहीं करते बात, कोरोना पर वीडियो बैठक में भी नहीं दिया मौका

यह इसलिए भी अहम है कि हेमंत सोरेन एक इंटरव्यू में कह चुके हैं कि आदिवासी नेताओं की आवाज लुटियन जोन में अक्सर अनसुनी कर दी जाती है। उन्हें वह हक नहीं मिलता, जो गैर आदिवासी मुख्यमंत्रियों और नेताओं को मिलता है। रांची की आवाज दिल्ली पहुंचते-पहुंचते मद्धम कर दी जाती है।

फोटोः रवि प्रकाश
फोटोः रवि प्रकाश 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश भर के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिये बात की, लेकिन उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बोलने का मौका नहीं दिया। यह दूसरा मौका है, जब प्रधानमंत्री ने झारखंड के मुख्यमंत्री से बात किए बगैर अपनी ऑनलाइन बैठक खत्म कर दी। कुछ दिनों पहले भी प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के साथ वीसी की थी। उस दौरान भी उन्होंने इस आदिवासी मुख्यमंत्री को बोलने का मौका नहीं दिया था।

हेमंत सोरेन ने तब भी मीडिया से यह पीड़ा साझा किया था। उन्होंने आज भी यह बात मीडिया को बताई। कुछ और राज्यों के मुख्यमंत्री भी इसी कतार में शामिल हैं, जिन्हें उस वीसी के दौरान बोलने का मौका नहीं मिल सका। संभव है कि यह महज एक इत्तेफाक हो। लेकिन, हेमंत सोरेन जैसे चर्चित युवा मुख्यमंत्री को लगातार दो बैठकों में बोलने का मौका नहीं मिलना, बीेजेपी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

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आज की वीसी के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया से कहा, “देखिए आज माननीय प्रधानमंत्री जी के साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्री जुटे हुए थे, लेकिन उनमें से कुछ ही लोगों को बोलने का मौका मिला। मुझे अभी तक अपनी बातें रखने का मौका नहीं मिला है। जब बारी आएगी, तब हम अपनी बात रखेंगे।” हालांकि, कुछ ऐसी ही बात हेमंत सोरेन ने पिछले वीडियो कान्फ्रेंसिंग के बाद भी मीडिया से कही थी।

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यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हेमंत सोरेन ने साल 2019 के संसदीय चुनावों के दौरान इस पत्रकार को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि आदिवासी नेताओं की आवाज लुटियन जोन में प्रायः अनसुनी कर दी जाती है। उन्हें वह हक नहीं मिलता, जो गैर आदिवासी मुख्यमंत्रियों और नेताओं को मिलता है। उन्होंने तब कहा था कि रांची की आवाज दिल्ली पहुंचते-पहुंचते मद्धम कर दी जाती है। इस कारण आजादी के सत्तर साल बाद भी वंचित समुदायों के लोग अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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एक सवाल यह भी है कि प्रधानमंत्री ने अगर सभी मुख्यमंत्रियों की राय सुनी ही नहीं, तब उस बैठक में लिए गए फैसलों को सर्वसम्मत कैसे कहा जा सकता है। यह उन अधिकारियों और मंत्रियों की भी अवहेलना है, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ इस वीसी में शामिल थे। आज की वीसी में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी भी शामिल हुए थे। यह बैठक कोरोना संक्रमण के खतरों को कम करने की रणनीति तैयार करने और लॉकडाउन के अनुभवों को समझने के लिए आयोजित की गई थी।

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