
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले नई दिल्ली में रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें विपक्षी नेताओं ने वोटर लिस्ट में बदलाव और हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट से लेकर बेरोजगारी, महंगाई, संघवाद और राज्यों में कानून व्यवस्था जैसे कई मुद्दे उठाए।
सरकार ने दोनों सदनों में कामकाज ठीक से चलाने के लिए यह सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। सोमवार को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले यह बैठक हुई।
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सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष उन जरूरी मुद्दों पर एकमत है, जिन पर सेशन के दौरान चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमने कई मुद्दे उठाए हैं, जिनमें एसआईआर, दिल्ली ब्लास्ट, प्रदूषण, संघवाद और दूसरी चिंताएं शामिल हैं। विपक्षी पार्टियों में एक राय है कि इन जरूरी मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। संसद चलाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की है, और अगर इसमें रुकावट आती है, तो जिम्मेदारी उनकी है। और अगर आपके पास पावर है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप सबको रौंद देंगे। हमें लगता है कि सरकार को जवाब देना चाहिए, और विपक्ष का सम्मान किया जाना चाहिए।”
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नवीन पटनायक के कहने पर अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे बीजेडी नेता सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ओडिशा के मुद्दों को उठाएगी।
उन्होंने कहा कि “महंगाई और बेरोजगारी बड़ी चिंताएं हैं। ओडिशा को स्पेशल कैटेगरी स्टेट का दर्जा मिलना चाहिए। ओडिशा में कानून व्यवस्था की हालत खराब हो रही है, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। हाल ही में हुए नुआपाड़ा उपचुनावों में हमने चुनावी गड़बड़ियां देखीं।”
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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर संसद सत्र छोटा करने और इसे शुरू करने में देरी करके पार्लियामेंट के नियमों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "शीतकालीन सत्र आज मात्र 19 दिन का है, जिनमें से सिर्फ 15 दिन ही चर्चा हो पाएगी। यह शायद अब तक का सबसे छोटा शीतकालीन सत्र होगा। शीतकालीन सत्र की शुरुआत भी देरी से हुई है। ऐसा लगता है कि सरकार खुद संसद को डिरेल करना चाहती है।
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उन्होंने कहा कि हमने सुरक्षा की बात उठाई कि इस शीतकालीन सत्र में सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो, जिसमें सबसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा आती है। दिल्ली में जो ब्लास्ट हुआ, वह कहीं न कहीं हमारी कानूनी और गृह विभाग की विफलताओं का एक बहुत बड़ा प्रमाण है, लेकिन ऐसा नहीं लगता है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहती है। दूसरी है लोकतंत्र की सुरक्षा की चर्चा।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी तीसरी मांग स्वास्थ्य से जुड़ी सुरक्षा से जुड़ी थी, जिस तरह से देश के हर कोने में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। चौथा मुद्दा हमारी आर्थिक सुरक्षा का था। पांचवां मुद्दा जो हमने उठाया, वह प्राकृतिक सुरक्षा था। जिस तरह से बाढ़, भूस्खलन और तूफान आ रहे हैं, उसकी कोई तैयारी नहीं है। हमने अपनी विदेश नीति का मुद्दा भी उठाया, जिसे हम देख रहे हैं कि भारत दूसरे देशों के अनुसार अपनी विदेश नीति बना रहा है।
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