
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को महिला गिग वर्कर्स की तकलीफों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि महिला गिग वर्कर्स अन्याय और शोषण का सामना कर रही हैं, लेकिन केंद्र और कई प्रदेशों की बीजेपी सरकारें आंख मूंदकर बैठी हुई हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पिछले कुछ महीनों से समाज के अलग-अलग वर्ग के लोगों के समूह से संसद में अपने कार्यालय में मुलाकात कर रहे हैं, जिन्हें उन्होंने ‘जनसंसद’ नाम दिया है। राहुल गांधी ने पिछले दिनों अपने इसी ‘जनसंसद’ कार्यक्रम में महिला गिग वर्कर के एक समूह से मुलाकात कर उनके मुद्दों को लेकर बातचीत की थी।
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राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘कुछ दिन पहले जनसंसद में गिग वर्कर्स के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात हुई। बातचीत से साफ़ हुआ कि गिग अर्थव्यवस्था के फ़ायदे मज़दूरों तक पहुंचाने के लिए मज़बूत और ज़िम्मेदार सरकारी कार्रवाई ज़रूरी है। आज गिग वर्कर के पास न स्थिर आय है, न सामाजिक सुरक्षा, न चिकित्सा/बीमा जैसी बुनियादी सुविधाएं। कार्य-जीवन संतुलन टूटा हुआ है और बुनियादी मानवीय सम्मान भी छिन रहा है।’’
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राहुल गांधी ने दावा किया, ‘‘महिला गिग वर्कर दोहरे शोषण का शिकार हैं, आर्थिक असुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और सुरक्षा का अभाव। सहयोग देने के बजाय उनसे श्रम की गरिमा छीनी जा रही है।’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘इस व्यवस्था में वर्ग और जाति आधारित भेदभाव गहराई से जुड़ा है। गिग वर्क क्षेत्र में बड़ी संख्या में दलित-आदिवासी समुदायों के श्रमिक हैं, जिनके साथ शोषण और बढ़ जाता है।’’
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कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्यों और केंद्र में बीजेपी की सरकारें इस अन्याय पर आंख मूंदे हैं और न मज़बूत क़ानून है, न सामाजिक सुरक्षा, न ही गिग कंपनियों की जवाबदेही है।राहुल गांधी ने कहा, ‘‘वहीं कांग्रेस की सरकारें अधिकार आधारित क़ानूनों पर काम कर रही हैं, ताकि गिग वर्कर को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम आय और समानता का अधिकार मिल सके। हम अपने राज्यों में एक मॉडल क़ानूनी ढांचा बना रहे हैं, जिसे देशभर में लागू किया जा सके।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गिग वर्कर की लड़ाई सिर्फ़ रोज़गार की नहीं, बल्कि यह सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई है।
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