
भारत की जनता आज दो बड़े स्वदेशी फेंकुओं का बड़ी बहादुरी से सामना कर रही है। एक फेंकू हर दिन भारत को 'विकसित राष्ट्र' बनाता रहता है। दूसरा फेंकू हर दूसरे-तीसरे दिन भारत को 'विश्वगुरु' बनाता रहता है। न इसे कुछ करना आता है, न उसे, दोनों को पिपहरी बजाना अवश्य आता है। दूर की, और दूर और दूर की फेंकना आता है। यही इनका इतिहास था, यही इनका वर्तमान है और यही इनका भविष्य है! जनता जिस दिन इनसे पूरी तरह ऊब जाएगी, वह भारत का स्वर्ण काल होगा और उसे ये अपनी हरकतों से नजदीक और नजदीक लाते जा रहे हैं, यह शुभ लक्षण है।
पहले फेंकू का टारगेट- आजादी की सौवीं वर्षगांठ 2047 है। इसने काफी लंबा समय मांगा है।पहले इसने 2022 तक का समय मांगा था। जनता ने दे दिया, ये ही टांय-टांय फिस्स हो गया! सारे फेंकू टांय-टांय फिस्स में एंटायरवाला एम ए होते हैं! अब इस फेंकू ने सीधे 25 साल बाद का टारगेट लिया है। यह जानता है कि इस बार इसकी परीक्षा होगी नहीं तो ये फेल भी नहीं होगा!
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भारत की जनता इतनी भोली नहीं है कि इसे इसकी उम्र के 97 साल तक झेलती रहेगी! जनता बहुत पहले इसका हिसाब-किताब कर देगी। बकाया नहीं छोड़ेगी। इससे पहले फेंकू की पार्टी में ही इससे भी बड़े-बड़े फेंकू पैदा हो जाएंगे, जो बगैर टेलीप्रांप्टर के इतनी दूर की और इतनी बढ़िया फेंकेंगे कि यह देखता रह जाएगा! वे इसे दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेकेंगे। मार्गदर्शक मंडल में भेजने की तकलीफ़ भी नहीं करेंगे!
दूसरा फेंकू ज्यादा सयाना है। उसने भारत को विश्वगुरु बनने का कोई निश्चित टारगेट नहीं दिया है। इसके अलावा वह कन्फ्यूज़ भी करता रहता है। कभी कहता है कि भारत विश्वगुरु बन चुका है, कभी कहता है कि भारत को विश्वगुरु बनना है। कभी कहता है कि भारत जब तक धर्म के मार्ग पर चलता रहेगा, तब तक विश्वगुरु बना रहेगा और कभी कहता है कि दुनिया के कल्याण के लिए भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा में काम करना है। है और नहीं के बीच यह अपना खेल, खेलता रहता है!
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किसी फेंकू को ही आज का भारत धर्म के मार्ग पर चलता हुआ दिखाई दे सकता है। वह इससे भी ऊंची फेंकते हुए यह कहता है कि भारत को दुनिया के 'कल्याण' के लिए 'विश्वगुरु' बनना है!बताइए ये विश्वगुरु भी दुनिया का कल्याण करने के लिए बनना चाहते हैं! इस समय तो ट्रंप दुनिया का पर्याप्त 'कल्याण' कर रहा है। उसके अभी तीन साल बचे हैं। इस बीच आश्चर्य नहीं कि वह भारत का भी काफी 'कल्याण' कर दे, अभी तो हमने इसका ट्रेलर ही देखा है! जहां तक इनका अपना सवाल है, जब ट्रंप मौजूद है तो कौन इनके पास अपना कल्याण करवाने आएगा!
चलो फिर भी इनका दिल रखने के लिए मान लेते हैं कि भारत 'विश्वगुरु' बन चुका है मगर वह किस 'विश्व' का 'गुरु' है? वह विश्व है कहां? इसी धरती पर है या कहीं और है? किसी और सौरमंडल में तो नहीं है? क्या इनके इस विश्व में अमेरिका भी शामिल है, जिसके सामने हमारे प्रधानमंत्री भीगी बिल्ली बने हुए हैं! तो क्या चीन हमें विश्व गुरु मानता है? रूस तो कहते हैं कि हमारा मित्र देश है, वह मानता है? फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी मानते हैं? अफ्रीकी महाद्वीप के देश मानते हैं? आजकल फिलीस्तीन नहीं, इजरायल हमारा मित्र है, क्या वह भारत को विश्वगुरु मानता है? एक भी मुस्लिम देश भारत को विश्वगुरु मानता है? पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान मानता है?
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विश्वगुरु तो पूरे विश्व का होता है- सारी दुनिया का, केवल हिंदुओं का नहीं, मुसलमानों, बौद्धों, ईसाइयों, यहूदियों सभी का होता है मगर है क्या? अच्छा चलो भूतपूर्व हिंदू राष्ट्र नेपाल मानता है क्या, भारत को विश्वगुरु? श्रीलंका? कंबोडिया? म्यांमार? तो कौन मानता है भारत को विश्वगुरु?केवल भागवत जी मानते हैं, मोदी जी मानते हैं और शाह साहब मानते हैं और इनके चंगू और मंगू भी मानते हैं!
ये अपने को सूर्य और चंद्र भी मानें, पूरा ब्रह्मांड भी मानें, नान बायोलॉजिकल भी मानें, तो कौन रोकता है? मानो, खूब मानो। दुनिया में कभी मूर्खता पर रोक नहीं रही है और मूर्खता इस प्रजाति का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसे संविधान भी छीन नहीं सकता! इसका लाभ शिखर से लेकर पाताल तक ये सब उठा रहे हैं। उठाओ मगर दुनिया तुम्हें विश्वगुरु-फुरु कुछ भी नहीं मानती!
ये सत्ता में और रह गए तो दुनिया किसी दिन भारत के अस्तित्व को भी मानने से इनकार कर सकती है! इसके संकेत मिलने लगे हैं! इसे नोट कर लो भक्तों! इस बीच जितनी गाली देना हो, दे लो और उस दिन का इंतजार करो!
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