
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे दो अहम लड़ाई लड़ रहे थे। इसमें पहला तो बीएमसी पर शिवसेना के 30 साल पुराने वर्चस्व और दूसरा बाल ठाकरे की विरासत को बचाना था। इसके लिए उद्धव ने अपने चेचरे भाई राज ठाकरे के साथ पुरानी दुश्मनी को भुलाकर पारिवारिक रिश्ता को मजबूत किया और मुंबई के मराठियों को एकजुट होने का आह्वान किया।
Published: undefined
अपनी इस राजनीतिक लड़ाई में उद्धव की बीएमसी की सत्ता में वापसी तो नहीं हो रही है। लेकिन उन्होंने बाल ठाकरे की विरासत को बचा लिया है जिसे उनसे एकनाथ शिंदे छीनना चाहते थे। शिंदे ने शिवसेना में विभाजन कराया और अब बीएमसी चुनाव में उद्धव से ज्यादा सीटें जीतकर बाल ठाकरे की विरासत पर कब्जा करना चाहते थे। लेकिन शिंदे की यह मंशा पूरी नहीं हो पाई।
Published: undefined
दरअसल एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 26 सीटों पर ही बढ़त मिल पाई जबकि उद्धव ने 61 सीटों पर बढ़त बनाकर यह साबित करने की कोशिश की कि बाल ठाकरे की विरासत के असली वारिस वही हैं। वैसे, पिछले चुनाव में उद्धव के पास 84 नगरसेवक थे। इस संख्या में कमी हुई है।
बीएमसी की सत्ता उद्धव के हाथ से तो निकल गई है। अगर शिवसेना में विभाजन नहीं होता तो चुनाव के नतीजे कुछ और ही होते। क्योंकि, बीजेपी ने शिंदे की शिवसेना से गठबंधन करके यह चुनाव लड़ा है। पिछले चुनाव की अपेक्षा बीजेपी लगभग एक दर्जन सीटें ही बढ़ा पाई है जबकि शिंदे को बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने का फायदा नहीं हुआ है।
Published: undefined
शिवसेना में विभाजन के बाद शिंदे की शिवसेना पहली बार बीएमसी चुनाव में उतरी थी। इससे पहले एकनाथ शिंदे ने उद्धव की शिवसेना के 100 से ज्यादा पूर्व नगरसेवकों को अपने पाले में कर लिया था। अगर मराठी माणुस और बीजेपी का समर्थन मिलता तो शिंदे गुट को 26 से ज्यादा सीटों पर बढ़त मिलती।
बीजेपी और शिंदे ने हिंदुत्व और मराठी के मुद्दे पर यह चुनाव लड़ा था। लेकिन चुनाव के नतीजे में जिस तरह से उद्धव के साथ मराठी माणुस दिख रहे हैं उससे यह कहा जा सकता है कि मुंबई के मराठी अब भी बाल ठाकरे के प्रति सहानुभूति रखते हैं। बीजेपी को उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीयों के वोट ज्यादा मिले हैं। ये वोट शिंदे की शिवसेना की तरफ नहीं गए हैं।
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined