
बीजेपी ने वर्ष 2010 के आसपास अगले लोकसभा चुनावों में सत्ता हथियाने की तैयारियां शुरू कर दी थीं। केंद्र की सत्ता के विरुद्ध जहर उगलना, झूठी खबरें फैलाना, राष्ट्रवाद का मिथ्या उन्माद, सनातन/हिन्दू का ध्रुवीकरण, अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा के साथ ही मीडिया, न्यायालय और लगभग सभी संवैधानिक संस्थाओं को अपने चंगुल में करने की शुरुआत 2010-2011 से की जा चुकी थी। इसके बाद से देश की हालत सभी देख रहे हैं।
अब पूरा समाज हिंसक हो चुका है, हत्याएं सामान्य हो चली हैं, बलात्कार का भी धर्म देखा जाने लगा है, मेनस्ट्रीम मीडिया वाले पालतू जानवरों से भी बदतर हो गए हैं और सभी संवैधानिक संस्थाएं और जांच एजेंसियां अपनी गरिमा ही नहीं बल्कि देश की और समाज की गरिमा भी अपने आकाओं के इशारे का इंतजार करने लगी हैं। देश धर्म से चलने लगा है और धर्म राजनीति बन गया है। देश के प्रधानमंत्री केवल एन्टाइअर पोलिटिकल साइंस के ही नहीं बल्कि धर्म, विज्ञान, इतिहास और भूगोल के भी विश्वगुरु बन चुके हैं।
Published: undefined
वर्ष 2010-2011 के बाद से सबसे अधिक अंतर भाषा और सामाजिक समरसता में आया है। इस समय के बाद पैदा हुए बच्चे अब किशोरावस्था में कदम रख रहे होंगें। जरा सोचिए, इन बच्चों को जो हम सीख दे रहे हैं, जो कुछ हम दिखा रहे हैं वह हमारे बचपन से कितना अलग है। अपनी किशोरावस्था में प्रवेश करते बच्चों के लिए सड़क के किनारे की दीवारें, खंभे, पुल, फ्लाइओवर- सभी पोस्टर चिपकाने की जगहें हैं और हरेक पोस्टर पर एक ही शक्ल नजर आती है। अखबार खोलो तो वही चेहरा, टीवी खोलो तो वही चेहरा- भगवान भले ही सर्वत्र हों या ना हों, पूरे देश में एक चेहरा तो सर्वत्र है।
आज के किशोर इस चेहरे को सुनते भी होंगें- “मन की बात” और “परीक्षा पे चर्चा” तो कंपलसरी है। अब जब इस चेहरे को सुनते होंगें तो क्या सीखेंगे– दुष्प्रचार, अनर्गल प्रलाप, दूसरे नेताओं पर भद्दी टिप्पणियां, चिल्ला कर बोलना और फूहड़ अंदाज में हाथों की भंगिमाएं। इन किशोरों के सामने जब वास्तविक समस्याएं आती होंगी तब इन्हें जरूर महसूस होता होगा कि समस्याओं का समाधान दुष्प्रचार से नहीं होता। भाषणों, विज्ञापनों और वक्तव्यों से बस मनोरंजन हो सकता है, और कुछ नहीं। एक चेहरा जब पोस्टरों से बाहर आता है तब कभी पूरे कपड़े समेत गंगा स्नान करने लगता है, कभी भभूत पोते हुए दिखता है, कभी किसी गुफा में ध्यान करने लगता है, कभी नगाड़ा बजाने लगता है, कभी मोरों को दाना डालने लगता है, तो कभी कचरा उठाने का नाटक करता है। आज के किशोरों को यह सब एक रहस्यमय नाटक से अधिक कुछ नहीं लगता होगा।
Published: undefined
बच्चे सोशल मीडिया पर खूब समय देते हैं। सोशल मीडिया की भड़काऊ तस्वीरें और भाषा निश्चित तौर पर बच्चों को हिंसक बना रही हैं। इसका उदाहरण तो रोज के समाचारों में भी नजर आने लगा है– मामूली बातों पर भी स्कूली छात्र एक दूसरे की हत्याएं करने लगे हैं- यह हमारे समाज का एक “न्यू नॉर्मल” है। पहले आपस में कितना भी लोग एक-दूसरे को गालियां दें, पर लिखने की भाषा हमेशा शिष्ट रहती थी, सार्वजनिक मंचों से दिए गए वक्तव्य हमेशा शिष्ट होते थे और मीडिया की एक संतुलित भाषा थी।
पर, अब सब बदल गया है, भाषा का सार्वजनिक स्वरूप ही हिंसक हो गया है– अब यही भाषा हमारी पहचान बन गई है। जीभ काट देंगें, गर्दन काट देंगें, बलात्कार कर देंगें, बदला लेंगे, हथियार उठा लेंगे– जैसे वक्तव्य तो लगातार बोले जाते हैं, सोशल मीडिया पर लिखे जा रहे हैं। यही भाषा सीख कर आज के किशोर बड़े होंगें, जाहिर है उनके वयस्क होने तक समाज आज से अधिक हिंसक हो जाएगा। यही नहीं, आज के किशोरों के लिए तो अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों के सदस्यों की हत्याएं भी बिल्कुल सामान्य सी घटना होगी।
Published: undefined
भाषा केवल हिंसक ही नहीं हुई है, बल्कि इसे आप ध्यान से देखेंगें तो शब्दों के मतलब भी बदल गए हैं, कई शब्दों के मतलब तो पूरी तरीके से विपरीत हो चुके हैं। आज के नेता यदि शांति, अमन-चैन की बातें करते हैं तो वे दरअसल समाज को अस्थिर करने की और हिंसा की बातें कर रहे हैं। शांति और अमन-चैन का सबसे सशक्त हथियार बुल्डोजर और जेसीबी हो चला है। महिला सशक्तीकरण का मतलब महिलाओं के वोटों को खरीदना हो चला है। अब सत्ता जब समाज के आखिरी आदमी की बात करती है तो अडानी-अंबानी का भला होता है। “वसुधैव कुटुंबकम” के कुटुंब शब्द के तो असंख्य पर्यायवाची हैं- पाकिस्तानी, खालिस्तानी, बांग्लादेशी, घुसपैठिए, चीनी, अर्बन नक्सल, टुकड़े-टुकड़े गैंग इत्यादि। “हम सत्ता के लिए राजनीति नहीं करते हैं” का मतलब “हम सत्ता लूटने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं” हो गया है। रामराज्य का मतलब झूठ का साम्राज्य हो चला है।
आज के किशोर केवल हिंसा ही नहीं सीखेंगे, बल्कि वे मानसिक तौर पर अशांत और कम बौद्धिक क्षमता वाले होंगें। अब तो सत्ता के इशारे पर पाठ्यक्रमों में भी सामाजिक ध्रुवीकरण को शामिल कर दिया गया है। पहले केवल दिल्ली और आस-पास के शहरों में पनपने वाला वायु प्रदूषण अब पूरे देश में पहुंच गया है। सरकार जितना इसे नियंत्रित करने का दावा करती है, इसका दायरा उतना ही बढ़ता जा रहा है। सरकार कहती है कि वायु प्रदूषण से ना तो कोई बीमार पड़ता है और ना ही कोई मरता है।
Published: undefined
दूसरी तरफ असंख्य अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि वायु प्रदूषण का बच्चों और किशोरों पर खतरनाक असर होता है और इसका प्रभाव जीवन-पर्यंत बना रहता है। इससे केवल सांस की बीमारियां ही नहीं होतीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है और बौद्धिक क्षमता भी प्रभावित होती है। इससे तनाव और अवसाद होता है और आदमी चिड़चिड़ा और उग्र हो जाता है। बच्चे भी उग्र हो रहे हैं। बीजेपी सरकार का विकास महज इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं और खनन हैं। केंद्र से लेकर बीजेपी शासित हरेक राज्य में ऐसी परियोजनाओं की बाढ़ आ गई है। इन परियोजनाओं के लिए पेड़ों के लिए हरियाली वाले क्षेत्र बहुत आवश्यक हैं, पर अब अधिकतर किशोरों और बच्चों के लिए आस-पास ऐसे क्षेत्र नहीं हैं।
Published: undefined
पिछले कुछ वर्षों में एक और बड़ा अंतर आया है- हरेक जगह पुलिस, सशस्त्र पुलिस और अर्द्ध-सैनिक बलों की तैनाती। दूसरी तरफ जगह-जगह से झांकते कैमरे भी सामान्य हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अपराध कम हो गए हैं या महिलायें सुरक्षित हो गई हैं। अब पुलिस और अर्द्ध-सैनिक बलों का काम अपराध रोकना नहीं है बल्कि सत्ता से प्रश्न पूछने वालों से एक आतंकवादी की तरह निपटना है। आज के किशोरों को यह सब बहुत सामान्य लगता होगा, पर हमारे देश में इस तरह की पाबंदियां या अभिव्यक्ति की निगरानी कभी नहीं रही है। पूरी तरह सघन निगरानी में बड़े होने वाले बच्चों की एक पूरी पीढ़ी तैयार हो रही है।
बच्चों के लिए पूरा समाज और देश बदल चुका है। शारीरिक और मानसिक तौर पर बच्चे कमजोर हो रहे हैं और सत्ता अब उनके मस्तिष्क और सोचने की प्रक्रिया को भी हैक कर रही है। आज के बच्चे सच नहीं देखते बल्कि आर्टिफ़िशियल इन्टेलिजेंस का मायाजाल देखते हैं और उसी से प्रभावित भी हो रहे हैं। बच्चे अब तर्कहीन भी हो रहे हैं, इसीलिए हिंसक होने लगे हैं।
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined