विचार

विष्णु नागर का व्यंग्यः बंगाल में थोड़ा-बहुत हर्ष जो बचा था, वह भी 'शुभेंदु राज' में हवा हो गया!

मुख्यमंत्री जी की जय हो। हम तो कहते हैं कि सारे भाजपाई मुख्यमंत्रियों की जय हो। सबकी विजय हो। 2047 का आगमन इसी तरह होता रहे, विकसित भारत बनता रहे!

विष्णु नागर का व्यंग्यः बंगाल में थोड़ा-बहुत हर्ष जो बचा था, वह भी 'शुभेंदु राज' में हवा हो गया!
विष्णु नागर का व्यंग्यः बंगाल में थोड़ा-बहुत हर्ष जो बचा था, वह भी 'शुभेंदु राज' में हवा हो गया! फोटोः IANS

शुभेंदु अधिकारी के राज में पश्चिम बंगाल में रामराज चालू आहे। तुलसीदास वाले रामराज में हर्षित भये, गये सब सोका वाली स्थिति थी। इनके राज में थोड़ा बहुत हर्ष जो बचा था, वह भी हवा हो गया और शोक ने कुर्सी संभाल ली।

इनके राज में बागेश्वर बाबा धीरेन्द्र शास्त्री जी कोलकाता बुलाए गए। शास्त्री जी गए। मगर पर्ची वाले बाबा ने वहां जाकर उपदेश पेलते हुए एक दिन कह दिया कि ये तुम बंगाली लोग दुर्गा पूजा के दौरान मछली का गंदा भोजन करते हो, यह मुझे पसंद नहीं। ऐसे हिंदुओं को उन्होंने पाखंडी कहा। वे तो चले गए मगर मुख्यमंत्री जी के लिए मुसीबत खड़ी कर गए। मछली तो वैसे भी बंगालियों का प्रिय भोजन है। खैर फिर भी लोगों ने किसी तरह उनकी बात सुन ली। विरोध भी काफी हुआ। मुख्यमंत्री और स्वयं शास्त्री जी को खंडन देना पड़ा।

दो-चार कांग्रेसियों ने गुस्से में आकर पर्ची वाले बाबा जी का फोटो जला दिया। सामान्य सी बात है। मोदी जी के फोटो भी जलाने वाले जलाते रहते हैं, मगर नये-नये बने हिंदू राष्ट्र के मुख्यमंत्री को बाबाजी का यह विरोध सहन नहीं हुआ। उनके आदेश पर इन चंद कांग्रेसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एक को गैरजमानती धारा में गिरफ्तार कर लिया गया। बीजेपी-संघ ब्रांड रामराज्य में यह संभव है। कहते हैं न फलाने जी हैं तो मुमकिन है!

इसी तरह प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच चुनाव करवाने के बारे में विवाद हो गया। विवाद आपसी मारामारी में बदल गया। हो सकता है एबीवीपी वाले थोड़ा ज्यादा पिट गए हों। हो यह भी सकता है कि वे पिटे कम हों, उनका इगो ज्यादा हर्ट हो गया हो। सरकार इनकी और वामपंथी इन्हें हाथ लगाने की हिम्मत कर जाएं, यह कैसे हो सकता है? उनके अंदर के शिवाजी और महाराणा प्रताप दोनों एकसाथ जाग उठे।

देर रात वे बड़ी संख्या में राड और डंडों से लैस होकर आए और धमाल मचा दिया। झंडे जला दिये, पोस्टर फाड़ दिये। तोड़ाफोड़ी कर दी। इस तरह अपनी विजय यात्रा निकाल ली। जय श्री राम कर लिया। इसके कई दिनों बाद मुख्यमंत्री जी की नींद खुली कि अच्छा मेरे रहते कोलकाता में ऐसा हो गया! संघी छात्र पिट गए!

हो सकता है कि नागपुर और दिल्ली से उनके पास संदेश आए हों कि क्या मुख्यमंत्री जी आप वहां क्या कर रहे हो? तृणमूल से लाकर हमने इसलिए तो आपको मुख्यमंत्री नहीं बनाया था कि हमारे छात्र हमारे राज्य में पिट जाएं और आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहो? ये नहीं चल सकता। जगदीप धनखड़ की राह पर आप क्यों बढ़ना चाहते हो? अभी-अभी तो बने हो। सबक सिखाओ इन वामपंथियों को वरना ये सिर पर चढ़ते जाएंगे। खा जाएंगे बीजेपी को। ममता दीदी की पार्टी तो गई ही समझो अब, मगर ये वामपंथी खतरनाक होते हैं। इनके पास दिमाग होता है, ये दिमागी नक्सल हैं। कब मुकाबले में आ जाएं, कुछ पता नहीं। हमारी असली लड़ाई वामपंथियों से है। जरा वहां कुछ तमाशा-वमाशा करके आओ। एबीवीपी के छोरे-छोरियों का हौसला बढ़ाओ।

शुभेंदु जी ने कहा होगा कि यस सर। मेरी कुर्सी का सवाल है। फौरन कुछ करता हूं। तो 19-20 अगस्त की घटना पर मुख्यमंत्री जी सितंबर में अभी तीन-चार दिन पहले 'भगवा सम्मान यात्रा' निकालने गए। तीन किलोमीटर की यात्रा करके माननीय जी जादवपुर यूनिवर्सिटी पहुंचे। वहां उन्होंने वामपंथी छात्रों को धमकाया कि लड़को, अब तो सुधर जाओ। अब संघियों की सरकार है। किसी ऐरे गेरे की नहीं। यहां अब भगवा का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। हम तुम्हें गांधी जी की तरह नहीं, सुभाष चन्द्र बोस की शैली में सबक सिखाएंगे। नेताजी को तो वे फालतू में बीच में ले आए, उनका मतलब था कि हिंसा करनी पड़ी तो भी करेंगे। तुम्हें ठीक कर देंगे। तुम्हें उखाड़ फेंकेंगे।

अब बताइए भगवा छात्र संगठन के छात्र पिट जाएं और वे भी राड-डंडे से पीटने आ जाएं फिर भी भगवा का अपमान हो जाता है! क्या बुद्धि पाई है महाशय ने! वाह!

भाजपाई आमतौर पर तिरंगा यात्रा निकालते रहते हैं, हालांकि वह वास्तव में वह भी होती है- भगवा यात्रा। उसका तिरंगे से कोई लेना-देना नहीं होता, सिवाय इसके कि उनके हाथ में तिरंगा होता है। वह मुसलमानों को आतंकित करो यात्रा होती है मगर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री  तिरंगे के चक्कर में पड़े नहीं, सीधे ही भगवा पर आ गए। खैर नेताजी को गांधी जी से लड़ाने के बाद उन्होंने अहिंसा के द्वारा वामपंथियों को ठीक करने का संदेश भी दिया। कहा कि हम गीता पाठ, हनुमान चालीसा और वेदपाठ करवाकर वामपंथियों को सीधा कर देंगे। इस मामले में वामपंथियों का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। गीता पाठ, वेद पाठ से उन्हें सुधरना होता तो बहुत पहले सुधर गए होते!

चलो ये तो वामपंथी हैं मगर शुभेंदु जी ब्रांड रामराज में एबीवीपी भी एबीवीपी के खिलाफ राज्य में धमाल मचाये हुए है। एक दूसरे से लड़ रहे हैं। बर्दवान में यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी है। वहां एबीवीपी के दो गुटों ने विश्वकर्मा पूजा के लिए अनुमति मांगी। कार्यकारी प्रिंसिपल ने झंझट से बचने के लिए दोनों को अनुमति दे दी पर ताकतवर गुट ने कहा कि वाह, हम इन्हें पूजा नहीं करने देंगे। हम करेंगे।

बस जी उस गुट ने तूफान मचा दिया। बाहर से वह गुट हथियार बंद लोगों को पकड़ लाया और बवाल काटा। विरोधी गुट के छात्रों की जमकर पिटाई की। फर्नीचर-कंप्यूटर सब तोड़ डाले। बेचारे अध्यापक जान बचाने के लिए वाशरूम में घुस गए वरना उनके हाथ पैर भी टूट जाते। एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इसके बावजूद कुछ नहीं किया। क्या पता सीएम साहब इसमें से किस गुट के साथ हों! रामराज में कुछ पता नहीं होता!

रामराज का एक और किस्सा सुनते जाइए। कोलकाता के लॉ कालेज में बार कौंसिल ऑफ इंडिया के बनाए नियमों के अनुसार कालेज न आने वाले छात्रों को वहां की वाइस प्रिंसिपल साहिबा ने परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से मना कर दिया। बस जी भगवा का अपमान हो गया। एबीवीपी के छात्रों ने महिला वाइस प्रिंसिपल साहिबा और चार महिला अध्यापिकाओं को एक कमरे में रातभर बंद रखा।

इसी बीच वाइस प्रिंसिपल साहिबा से जबरन त्यागपत्र लिखवा लिया कि पारिवारिक और स्वास्थ्यगत कारणों से मैं पद छोड़ रही हूं। उन्होंने पुलिस से मदद मांगी। मामला एबीवीपी का था। पुलिस ने अपने हाथ जलाना ठीक नहीं समझा। अब वे कोलकाता हाईकोर्ट के पास गई हैं। रामराज में कुछ भी मुमकिन है। वैसे संतोष करने वाले कह सकते हैं कि ये सब पहले भी होता था, अब भी हो रहा है और आगे भी होगा। हम भी चाहते हैं किसी को कष्ट न पहुंचे, सब खुश रहें।

मुख्यमंत्री जी की जय हो। हम तो कहते हैं कि सारे भाजपाई मुख्यमंत्रियों की जय हो। सबकी विजय हो। 2047 का आगमन इसी तरह होता रहे, विकसित भारत बनता रहे!

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