
शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा का बुधवार को निधन हो गया। 89 वर्षीय ढींडसा लंबे समय से बीमार चल रहे थे और राजनीतिक गतिविधियों से भी कुछ हद तक दूर हो चुके थे। उनके निधन से पंजाब की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।
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सुखदेव सिंह ढींडसा का राजनीतिक जीवन बेहद समर्पण और सादगी से भरा रहा। वे लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) से जुड़े रहे और पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते थे। पार्टी में उन्हें संरक्षक की भूमिका भी सौंपी गई थी। हालांकि, मतभेद के चलते उन्हें पिछले वर्ष पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में शिरोमणि अकाली दल से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) से नाता जोड़ा और एक बार फिर राजनीतिक मंच पर सक्रिय होने की कोशिश की।
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बीते कुछ वर्षों से ढींडसा की तबीयत लगातार खराब चल रही थी। वे कई बीमारियों से ग्रसित थे और इसी कारण उन्होंने सार्वजनिक जीवन से भी दूरी बना ली थी। बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। ढींडसा ने 1972 में धनौला से अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद वे 1977 में सुनाम, 1980 में संगरूर और 1985 में फिर से सुनाम से विधायक निर्वाचित हुए। वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रसायन एवं उर्वरक मंत्री और खेल मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे।
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उनके निधन पर कई राजनीतिक नेताओं ने गहरा शोक जताया है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “सुखदेव सिंह ढींडसा जी के निधन की खबर से अत्यंत दुखी हूं। वे एक गरिमापूर्ण, ईमानदार और समर्पित नेता थे, जिन्होंने हमेशा पंजाब की निष्ठा से सेवा की। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। वाहेगुरु उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।” सुखदेव सिंह ढींडसा के निधन से पंजाब ने एक अनुभवी और जनसेवा को समर्पित नेता को खो दिया है। उनके योगदान को राजनीति में हमेशा याद किया जाएगा।
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