शख्सियत

गालिब रेस्टोरेंट से बॉलीवुड: मोहम्मद अजीज की वो आवाज, जिससे 80-90 का दशक बना यादगार

1980 के दशक में जब बॉलीवुड में रफी साहब का दौर खत्म हुआ, तब उनकी जगह भरने वाले गायकों की तलाश थी। उसी समय मोहम्मद अजीज ने अपनी आवाज से सबका ध्यान खींचा। फिल्म 'मर्द' का गाना 'मर्द तांगेवाला' उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना, जिससे वह रातों-रात मशहूर हो गए।

गालिब रेस्टोरेंट से बॉलीवुड: मोहम्मद अजीज की वो आवाज, जिससे 80-90 का दशक बना यादगार
गालिब रेस्टोरेंट से बॉलीवुड: मोहम्मद अजीज की वो आवाज, जिससे 80-90 का दशक बना यादगार फोटोः IANS

बॉलीवुड के दिग्गज गायक मोहम्मद अजीज ने 80 और 90 के दशक में हिंदी सिनेमा को नई पहचान दी। उनका सफर भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा, जिसकी शुरुआत एक छोटे से रेस्टोरेंट से हुई और जल्द ही वह बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय गायकों में शामिल हो गए। उनके शुरुआती संघर्ष में कोलकाता के 'गालिब' रेस्टोरेंट का खास योगदान रहा, जहां से उनकी किस्मत ने पहला बड़ा मोड़ लिया।

मोहम्मद अजीज का जन्म 2 जुलाई 1954 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। उनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद अजीत उल नबी था। बचपन से ही उन्हें संगीत से गहरा लगाव था और वह अक्सर गाने गुनगुनाते रहते थे। वह महान गायक मोहम्मद रफी के गाने सुनकर खुद भी वैसा ही गाने की कोशिश करते थे। उनके करियर की सबसे दिलचस्प शुरुआत कोलकाता के 'गालिब' रेस्टोरेंट से हुई। यहां वह लाइव गाना गाया करते थे। उनकी आवाज इतनी सुरीली थी कि लोग उन्हें सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाते थे। कई बार लोग उनकी परफॉर्मेंस से खुश होकर टिप भी देते थे।

उस समय यह धीरे-धीरे उनकी पहचान बनता जा रहा था। इसी रेस्टोरेंट में एक बड़ा संयोग भी हुआ, जब वहां कई फिल्म निर्माता आने लगे और उनकी आवाज पर उनका ध्यान गया। इसी दौरान एक बंगाली फिल्म निर्माता ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें अपनी फिल्म में गाने का मौका दे दिया। यही उनके करियर का पहला बड़ा ब्रेक था। इसके बाद वह संगीत की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत से इंडस्ट्री में जगह बनानी शुरू की।

1980 के दशक में जब बॉलीवुड में रफी साहब का दौर खत्म हुआ, तब उनकी जगह भरने वाले गायकों की तलाश थी। उसी समय मोहम्मद अजीज ने अपनी आवाज से सबका ध्यान खींचा। संगीतकार अनु मलिक ने उन्हें पहला बड़ा बॉलीवुड मौका दिया। 1985 में फिल्म 'मर्द' का गाना 'मर्द तांगेवाला' उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना। यह गाना सुपरहिट हुआ और वह रातों-रात मशहूर हो गए।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, अनु मलिक और बप्पी लाहिड़ी जैसे बड़े संगीतकारों के साथ काम किया और लगातार हिट गाने दिए। उन्होंने अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सनी देओल, संजय दत्त और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारों के लिए गाने गाए। उनके कुछ सबसे लोकप्रिय गीतों में 'आप के आ जाने से', 'ऐ वतन तेरे लिए', 'मेरा नाम है लखन', 'मैं तेरी मोहब्बत में पागल हो जाऊंगा', 'बहुत जताते हो चाह हमसे', 'तेरा बीमार मेरा दिल', 'तू मुझे कबूल', 'आदमी जिंदगी और ये आत्मा', 'दिल दिया है जान भी देंगे', 'त्रिदेव', 'चालबाज' और 'खुदा गवाह' जैसे गाने शामिल हैं।

उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली और उड़िया फिल्मों में भी गाना गाया और लगभग 20 हजार से ज्यादा गीत रिकॉर्ड किए। इन गीतों ने उन्हें स्टार बना दिया। उन्होंने 80 और 90 के दशक की संगीत दुनिया को भी एक खास पहचान दी। 27 नवंबर 2018 को 64 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। बताया जाता है कि वह कोलकाता से एक कार्यक्रम करके मुंबई लौट रहे थे, तभी एयरपोर्ट पर उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत नानावटी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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