राजनीति

कांग्रेस ने RSS के गढ़ नागपुर में BJP का 58 साल पुराना ताज छीना, महाराष्ट्र के ताजा नतीजे मोदी सरकार के लिए झटका

महाराष्ट्र विधान परिषद की 6 छह सीटों के लिए एक दिसंबर को हुए चुनाव के नतीजे शुक्रवार को आए, जिसमें कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी को महज एक सीट मिली है। एक सीट पर निर्दलीय की जीत हुई है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस के लिए यह दोहरा उत्सव मनाने का समय है, क्योंकि गठबंधन की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक सप्ताह पहले ही अपना एक साल पूरा किया और अब विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने आरएसएस के गढ़ नागपुर में बीजेपी को हरा दिया है। सभी राजनीतिक भविष्यवाणियों को खारिज करते हुए 58 साल के बाद कांग्रेस के युवा नेता अभिजीत वंजारी ने द्विवार्षिक चुनावों में प्रतिष्ठित नागपुर स्नातक सीट पर बड़ी जीत हासिल की है।

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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए हैं। सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में साझेदार शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। छह सीटों के लिए एक दिसंबर को हुए द्विवार्षिक चुनावों में एमवीए ने चार सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी को महज एक सीट पर जीत मिली है और एक सीट पर निर्दलीय की जीत हुई है।

लेकिन इस चुनाव में नागपुर डिवीजन की जीत सबसे अधिक मायने रखती है। क्योंकि इस सीट से विपक्षी दल बीजेपी के उम्मीदवार और नागपुर के मेयर संदीप जोशी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। आक्रामक और उत्साही नेता माने जाने वाले अभिजीत वंजारी ने महा विकास अघाड़ी के सभी घटकों, लोगों के समर्थन और खुद की कड़ी मेहनत के प्रयासों से यह सफलता पाई है और उन्होंने 58 साल बाद 'मिशन असंभव' को संभव कर दिखाया है।

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दरअसल नागपुर बीजेपी की पितृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गढ़ कहा जाता है, जहां उसका मुख्यालय भी है। इस सीट पर पहले जनसंघ का कब्जा रहा और बाद में बीजेपी के अस्तित्व में आने के बाद से यह सीट उसके पास रही। दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस के पिता दिवंगत गंगाधरराव फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय राजनीति में जाने से पहले नागपुर का प्रतिनिधित्व किया। गडकरी ने तो इस सीट का चार बार (1989 से 2014) प्रतिनिधित्व किया।

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इसके अलावा पुणे निर्वाचन क्षेत्र से एमवीए के उम्मीदवार अरुण लाड ने बीजेपी उम्मीदवार संग्राम देशमुख को बुरी तरह हराया। इसके अलावा, औरंगाबाद डिवीजन के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एनसीपी के सतीश चव्हाण ने बीजेपी के शिरीष बोरालकर को हराकर जीत हासिल की। कांग्रेस के जयंत असगांवकर ने निर्दलीय दत्तराय सावंत को पछाड़ते हुए 20 साल बाद पुणे शिक्षक निर्वाचन सीट जीती। वहीं अमरावती डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एक निर्दलीय किरण सरना ने शिवसेना के श्रीकांत देशपांडे को हराया। केवल धुले-नदुरबार में बीजेपी ने जीत हासिल की है।

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इन चुनाव परिणामों पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा, "तस्वीर ने स्पष्ट रूप से बदल दिया है कांग्रेस ने नागपुर सीट जीत ली है। यह एमवीए सरकार के प्रदर्शन में विश्वास का प्रतिबिंब है।" वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने इसे एमवीए द्वारा किए गए अच्छे कार्यो के लिए लोगों का आशीर्वाद कहा।

वहीं, बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह माना कि परिणाम उम्मीदों के अनुसार नहीं आए हैं। यहां तक कि बीजेपी में राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे जैसे नेताओं ने 'आत्मनिरीक्षण' की बात कही है। फडणवीस ने कहा, "तीन दलों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा था। हमने उनकी संयुक्त ताकत को देखते हुए कड़ी मेहनत की। मगर हमें आगे और कड़ी मेहनत करनी होगी।"

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