
बिहार विधानसभा में गुरुवार को सत्ताधारी दल के विधायक ने ही मंत्री के दिए गए जवाब के बाद उन्हें आड़े हाथों लिया और लोकोक्ति के जरिए कटाक्ष किया। विधायक ने मंत्री के जवाब पर कहा कि मंत्री 'हंसुआ के बियाह में खुरपी के गीत' गा रहे हैं। इसके बाद सदन में ठहाके भी गूंजे।
बीजेपी के विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सदन में वृद्ध और दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन राशि को काफी कम बताते हुए कहा कि राज्य में वृद्ध, विधवा एवं दिव्यांग के लिए 400 रुपये सहायता राशि दी जाती है, जो बहुत कम है। इस स्थिति में दिव्यांगों के लिए दिल्ली में 2500, हरियाणा में 3000, गोवा में 3000 की सहायता राशि दी जा रही है। इसी तरह अन्य राज्यों में भी इनकी सहायता देने में सरकार उदार है।
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ऐसे में सरकार वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन एवं दिव्यांग सहायता राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर हरियाणा के अनुरूप 3000 रुपये करने के लिए सरकार का ध्यान आकृष्ट कर रहा हूं।
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि राज्य सरकार 95 लाख 67 हजार लाभुकों को पेंशन दिया जाता है, जिसमें कुल 4440 करोड़ रुपये का व्यय होता है। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य सरकार द्वारा 72 प्रतिशत राशि खर्च करती है। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद पात्र व्यक्तियों को पेंशन दे रही है।
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इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी वृद्ध और दिव्यांग पेंशन में बढ़ोत्तरी की पुरजोर मांग उठाई। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के साथ सरकार का बजट बढ़ा है। पेंशन भी अब कम से कम 1500 रुपए प्रतिमाह होनी चाहिए।
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इधर, मंत्री से सकरात्मक उत्तर नहीं मिलने से क्षुब्ध विधायक ने कहा कि यह जो मंत्री का उत्तर हुआ वह 'हंसुआ के बियाह में खुरपी के गीत' जैसे हुआ। उन्होंने कटाक्ष करते हुए आगे कहा 'का पर करूं श्रृंगार जब पिया मोर आंधर'। विधायक के इस कटाक्ष के बाद सदन में खूब ठहाके गूंजे।
विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने भी कहा कि इन लोगों को मुहावरा बड़ा पसंद है। खूब मुहावरे बोलिए।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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