
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से टीएमसी में विद्रोह की लपटें अब पार्टी के संसदीय दल तक पहुंच गई हैं। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को दावा किया कि तृणमूल के 20 सांसदों ने बैठक के बाद लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है।
तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार का यह दावा ठीक उसी समय सामने आया जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ दिल्ली में विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल हो रही थीं। खास बात यह है कि लगभग उसी समय ममता के करीबी रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।
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काकोली घोष ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले के बारे में लोकसभा अध्यक्ष को सूचित कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘करीब बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है और इनमें मैं भी शामिल हूं। हमने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर एनडीए को समर्थन देने की अपनी इच्छा व्यक्त की है।’’
सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष कहा कि उनका मत है कि काकोली सदन में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित कोई भी बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरे नहीं किए गए थे। टीएमसी के एक अन्य सांसद ने कहा कि ममता के नेतृत्व वाली तृणमूल ने काकोली को मुख्य सचेतक पद से हटाने और उनके स्थान पर कल्याण बनर्जी को नियुक्त करने का फैसला किया था, लेकिन इसकी सूचना लोकसभा सचिवालय को नहीं दी गई थी।
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काकोली ने दावा किया कि वह लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हैं और कहा कि यह निर्णय साथी सांसदों के बीच परामर्श के बाद लिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘हमने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना है कि हमारा भविष्य का राजनीतिक मार्ग एनडीए के अनुरूप होना चाहिए।’’
बागी सांसदों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बगावत करने वाले लोकसभा सदस्यों ने तत्काल तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने या बीजेपी में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे एनडीए का समर्थन करते हुए एक अलग संसदीय गुट के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि यह रणनीति दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
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सूत्रों ने बताया कि यह गणित राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तृणमूल के वर्तमान में 28 लोकसभा सदस्य हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली हुई है। 20 सदस्यों का समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत को आसानी से पार कर जाएगा।
यह घटनाक्रम बागी सांसदों द्वारा नयी दिल्ली में एक बंद कमरे में बैठक करने के एक दिन बाद सामने आया है। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों पर तृणमूल नेतृत्व के अधिकार को लेकर उठने वाले सवाल और भी तेज होने की आशंका है। ममता बनर्जी के लिए, संकट अब संगठनात्मक असहमति से आगे बढ़कर पार्टी की संसदीय ताकत पर से नियंत्रण खोने की आशंका में तब्दील हो गया है। इसके राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल और विपक्षी गठबंधन, दोनों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
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