राजनीति

TMC के बागी गुट ने ममता बनर्जी को पद से हटाया, अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाया, अभिषेक को महासचिव पद से सस्पेंड किया

इस खींचतान के बीच अब टीएमसी के चुनाव चिह्न और करीब 1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड पर भी विवाद गहरा गया है। बागी गुटों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। वहीं पार्टी फंड को लेकर भी जंग छिड़ गई है।

TMC के बागी गुट ने ममता बनर्जी को पद से हटाया, अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाया, अभिषेक को महासचिव पद से सस्पेंड किया
TMC के बागी गुट ने ममता बनर्जी को पद से हटाया, अरूप रॉय को अध्यक्ष बनाया, अभिषेक को महासचिव पद से सस्पेंड किया फोटोः सोशल मीडिया

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष और गहरा गया है। इसी कड़ी में आज पश्चिम बंगाल में उस समय एक बड़ा राजनीतिक धमाका हुआ, जब बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को 'असली टीएमसी' बताते हुए ममता बनर्जी को ही पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया। वहीं पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी को भी निलंबित कर दिया गया। बैठक में हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया

सोमवार को न्यू टाउन स्थित एक होटल में ऋतब्रत बनर्जी गुट की बैठक हुई। इस गुट का दावा है कि इस बैठक में 60 विधायक और कोलकाता नगर निगम के 70 पार्षद शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में बुलाई गई बैठक में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी को पद से हटाते हुए विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना। इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब टीएमसी के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है।

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बागी गुट ने नई नेशनल वर्किंग कमेटी बनाई

बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया है। बनर्जी ने पार्टी की नई नेशनल वर्किंग कमेटी का ऐलान करते हुए कहा कि पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस नेताओं और सदस्यों के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।’’ बनर्जी ने इस प्रक्रिया की वैधता को मजबूत करने की कोशिश करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है और विशेष सत्र का विवरण निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे।’’

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ममता मुख्य सलाहकार बन सकती हैंः ऋतब्रत

बनर्जी ने कहा, ‘‘हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा।’’ उन्होंने बताया कि नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के एक पैनल का गठन करेंगे।’’ बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो बागी गुट की मुख्य सलाहकार बन सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है।’’

यह विशेष सत्र पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में उत्पन्न अभूतपूर्व संकट के बीच आयोजित किया गया। कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। बागी गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और बढ़ गई है। इसके बाद हाल ही में पार्टी को संसद में एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया, साथ ही बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की।

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तीन हिस्सों में बंटी टीएमसी!

ताजा घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन हिस्सों में बंटी दिखाई दे रही है। पहला गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल टीएमसी है। दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का 'टीएमसी' गुट है, जो अब विधानसभा में विपक्षी दल होने का दावा कर रहा है। वहीं तीसरा गुट करीब 20 लोकसभा सांसदों का बताया जा रहा है, जिन्होंने बीजेपी नेताओं के साथ कई बैठकों के बाद नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने और संसद में एनडीए सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है।

चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर बागियों की नजर

इस राजनीतिक खींचतान के बीच अब टीएमसी के चुनाव चिह्न और करीब 1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड पर भी विवाद गहरा गया है। बागी सांसदों ने संकेत दिए हैं कि वे पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। वहीं पार्टी फंड को लेकर भी जंग छिड़ गई है। पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अरूप बिस्वास ने बैंक को पत्र लिखकर टीएमसी के तीन खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था, जिसके बाद खातों को फ्रीज कर दिया गया है।

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बैंक खाते फ्रीज होने पर हाईकोर्ट पहुंची पार्टी

उधर, टीएमसी ने अपने तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि इन खातों को किसके निर्देश पर और किस कारण से फ्रीज किया गया। सोमवार को टीएमसी के वकीलों ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष याचिका दायर करने की अनुमति मांगी। अदालत ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और इस मामले की औपचारिक सुनवाई सप्ताह के अंत तक शुरू हो सकती है। जिन तीन खातों को फ्रीज किया गया है, उनमें कुल करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं।

मामले की शुरुआत तब हुई थी, जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर टीएमसी के तीन खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के कारण इन खातों के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति है। दरअसल, विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद टीएमसी ने 5 जून को संगठनात्मक फेरबदल किया था। पार्टी ने पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था और अरूप बिस्वास को इस पद से हटा दिया गया था। बाद में अरूप बिस्वास ने बैंक को भेजे गए पत्र में खुद को ही पार्टी का वैध कोषाध्यक्ष बताया था।

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टीएमसी के कई बैंक खाते कोलकाता स्थित एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा में हैं। अरूप बिस्वास के पत्र के बाद इन खातों में लेन-देन अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जिससे पार्टी के भीतर विवाद और बढ़ गया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। अपने तीन पन्नों के जवाब में अरूप बिस्वास ने पार्टी के वित्तीय लेन-देन पर कई सवाल उठाए। उनका आरोप है कि वह केवल हिसाब-किताब संभालते थे, जबकि कई वित्तीय फैसले और लेन-देन उनकी जानकारी के बिना किए जाते थे।

इस बीच, टीएमसी से बगावत कर चुके विधायकों के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी ने भी अरूप बिस्वास का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन खातों में मौजूद धन की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि कहीं इसमें अवैध रूप से जुटाई गई रकम तो शामिल नहीं है। 19 जून को करीब 10 बागी टीएमसी विधायकों ने बिधाननगर साउथ थाने से इन बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी और तीन खातों को फ्रीज कर दिया।

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