
केरल के कासरगोड जिले की एक अदालत ने सोमवार को पुलिस को राज्य बीजेपी प्रमुख के. सुरेंद्रन और पार्टी के दो अन्य नेताओं के खिलाफ एक शिकायत पर चुनाव कानूनों के तहत मामला दर्ज करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने यह अनुमति एक उम्मीदवार के उस आरोप पर दी है, जिसमें उसने कहा है कि उसे 6 अप्रैल की विधानसभा चुनाव में अपना नामांकन वापस लेने के लिए पैसे दिए गए थे।
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बीएसपी उम्मीदवार के. सुंदरा ने पिछले हफ्ते मीडिया के सामने स्वीकार किया था कि उन्हें मंजेश्वरम सीट से चुनाव लड़ने के लिए 2.5 लाख रुपये और एक स्मार्टफोन दिया गया था, जहां से सुरेंद्रन चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि सुरेंद्रन के जीतने पर उन्हें कर्नाटक में 15 लाख रुपये, एक घर और एक वाइन पार्लर की पेशकश की गई थी। हालांकि, जब 2 मई को वोटों की गिनती हुई, तो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ उम्मीदवार ए.के.एम. अशरफ ने सुरेंद्रन को 745 मतों के अंतर से हराया।
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इस मामले में मंजेश्वरम से सीपीएम उम्मीदवार वी.वी. रामेसन शिकायतकर्ता हैं, जो तीसरे स्थान पर रहे। कासरगोड के प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट ने सुरेंद्रन और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करने की अनुमति दी है। हालांकि, उसने फिलहाल किसी भी गिरफ्तारी से इनकार किया है।
बीएसपी प्रत्याशी के खुलासे के बाद से सत्तारूढ़ सीपीएम के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है। हालांकि, सुरेंद्रन और उनकी पार्टी ने इस आरोप का तुरंत खंडन किया।
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दरअसल 2016 के विधानसभा चुनावों में, सुरेंद्रन 89 मतों के मामूली अंतर से हार गए थे और उस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले सुंदरा को 467 वोट मिले थे।
बीजेपी को लगा कि इस बार सुंदरा के बीएसपी उम्मीदवार के रूप में आने से उनका नाम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में सुरेंद्रन के नाम के ठीक पहले आएगा और यह सुरेंद्रन की किस्मत को खराब कर सकता है। हालांकि. सुंदरा ने नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन अपने पद से इस्तीफा देते हुए नाम वापस ले लिया था।
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