
केंद्र की मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह से घिरी हुई है। एक ताजा रिपोर्ट से मोदी सरकार की मुश्किलें और बढ़ती दिख रही है। इस रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में मोदी सरकार के लिए परेशानियां कम होने के बजाए बढ़ने वाली है। दरअसल आने वाले दिनों में देश में नौकरियों का संकट गहराने वाला है! रिपोर्ट के अनुसार, देश में नई नौकरियों कम पैदा होंगी और इसकी वजह मशीनीकरण (ऑटोमेशन) को बताया जा रहा है। इकॉनोमिक टाइम्स ने टीमलीज सर्विसेज के हवाले से एक खबर प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया है कि ई-कॉमर्स, बैंकिंग, फाइनेशियल सर्विस, इंश्योरेंस और बीपीओ-आईटी सेक्टर की नौकरियों में साल 2019-23 के बीच 37% की गिरावट आ सकती है। यह गिरावट 2018-22 की अनुमानित आंकड़ों से भी नीचे है।
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इन सेक्टर्स के अलावा मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग, कृषि, एग्रोकेमिकल, टेलीकम्यूनिकेशंस, बीपीओ, आईटी, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल जैसे अहम क्षेत्रों में भी नौकरियों की दर में गिरावट आ सकती है।
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हालांकि शॉर्ट टर्म के लिए देखें तो अप्रैल-सितंबर के दौरान नौकरियों की दर में इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में जो कर्मचारी आधुनिक तकनीक और नई स्किल से लैस होंगे उन्हें कम स्किलफुल कर्मचारियों की तुलना में ज्यादा फायदा होगा। नौकरियों के इस संकट का असर सबसे ज्यादा एग्रीकल्चर और एग्रोकेमिकल सेक्टर पर पड़ सकता है और इस सेक्टर में आने वाले सालों में 70% तक नौकरियों में गिरावट आ सकती है। वहीं कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर में 44% नौकरियों की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल और अलाइड इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा नौकरियों के मौके मिल सकते हैं, लेकिन इस सेक्टर में ग्रोथ की बात करें तो यह सिर्फ 10% ही रहेगी।
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