
खबरों से परे वाराणसी का सच चौंकाता है। मणिकर्णिका पर चले बुलडोजर के साथ दालमंडी में तोड़े जा रहे घरों और दुकानों का कोई खैरख़्वाह नहीं है। लोगों की सहमति के बिना प्रशासन अपनी मनमानी पर उतारू है। सवाल यह है कि वाराणसी में विकास के नाम पर जो हो रहा है, उसमें बनारस कहां है? ग्रामीण इलाकों में छोटे और सीमांत किसानों की जमीनें भूमि अधिग्रहण कानून का उल्लंघन कर क्यों अधिगृहित की जा रही हैं। 15 से ज्यादा प्रोजेक्ट के लिए 4 हजार एकड़ से ज्यादा की भूमि अधिग्रहित करने की प्रक्रिया ने लोगों को खून के आंसू रूला दिया है। ऐसे में वाराणसी का सच जानना बहुत अहम हो जाता है। इसी मुद्दे पर वाराणसी के गांधीवादी और जनवादी कार्यकर्ताओं से नवजीवन की बातचीत
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