'JNU में कोई कोना बचा नहीं है, जहां छात्र प्रोटेस्ट कर सकें'
दानिश अली ने कहा कि JNUSU की लड़ाई सिर्फ निलंबन के खिलाफ नहीं है, यह 'राइट टू यूनियन' को बचाने और सीपीओ मैनुअल के जरिए प्रतिरोध की आवाज उठाने वाले छात्रों को वर्षों से दंडित किए जाने के खिलाफ जातिवादी मानसिकता की वाइस चांसलर को हटाने की लड़ाई है।
By नंदलाल शर्मा
'JNU में कोई कोना बचा नहीं है, जहां छात्र प्रोटेस्ट कर सकें' फोटोः नवजीवन
JNU छात्र संघ की संयुक्त सचिव दानिश अली ने कहा कि 'सीपीओ मैनुअल 2023 के बाद यूनिवर्सिटी में कोई कोना नहीं बचा है, जहां छात्र प्रोटेस्ट कर सकें। स्कूल एरिया के साथ हॉस्टल में भी प्रोटेस्ट की मनाही है। हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद एडमिन ब्लॉक के सौ मीटर के दायरे में प्रोटेस्ट नहीं कर सकते। साथ ही सवाल पूछने वाले छात्रों के खिलाफ जुर्माना लगाकर लाखों रुपयों की वसूली की गई है। इसलिए JNUSU की लड़ाई सिर्फ निलंबन के खिलाफ नहीं है, यह 'राइट टू यूनियन' को बचाने और सीपीओ मैनुअल के जरिए प्रतिरोध की आवाज उठाने वाले छात्रों को वर्षों से दंडित जाने के खिलाफ जातिवादी मानसिकता की वाइस चांसलर को हटाने की लड़ाई है।' देखिए दानिश अली के साथ नवजीवन की बातचीत