
आरएसएस के मजदूर संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने अर्थव्यवस्था को 'गलत दिशा में ले जाने के लिए' सरकार को आड़े हाथों लिया है। बीएमएस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 'मौजूदा सुधार प्रक्रिया को वापस' लेने और बिना रोजगार वाले विकास पर 'अतिरिक्त जोर' नहीं देने को कहा है। बीएमएस का कहना है कि इससे बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ रही है। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष साजी नारायणन ने सरकार से 'अर्थव्यवस्था की गिरावट रोकने के लिए' श्रम से संबंधित क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के लिए प्रोत्साहन पैकेज देने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बेरोजगारी को कम करने के लिए जिन उपायों पर अतिरिक्त जोर दिया है, उससे बेरोजगारी कम होने की बजाय बढ़ रही है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) ने पहले ही हमारे लघु उद्योगों के साथ-साथ खुदरा व्यापार क्षेत्र को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसके अलावा बैंकिंग गतिविधियों समेत सरकार की बहुत सारी वित्तीय गतिविधियां धीमी हो रही हैं।
नारायणन ने सरकार से मौजूदा सुधार प्रक्रिया वापस लेने और रोजगार सृजन करने के लिए भर्ती प्रक्रिया से प्रतिबंध हटाने की मांग की।
उन्होंने कहा, "आम आदमी की खरीदारी की शक्ति को मजबूत करना हमारी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने का मुख्य समाधान है। किसी भी प्रोत्साहन पैकेज को निजी या कॉरपोरेट क्षेत्र को नहीं दिया जाना चाहिए। प्रोत्साहन पैकेज सीधे तौर पर तीन सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों - कृषि, लघु उद्योग क्षेत्र (विनिर्माण क्षेत्र सहित) और निर्माण क्षेत्र को मिलना चाहिए।"
नारायणन ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई ग्रामीण रोजगार की योजना मनरेगा आज के समय में कई राज्यों में गंभीर संकट में है क्योंकि 6 महीने के बाद भी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, "सरकार को मनरेगा का कार्य दिवस मौजूदा 100 दिनों से बढ़ाकर 200 दिन प्रति वर्ष करना चाहिए और इसे कृषि कार्यो से जोड़ना चाहिए। इसमें अगले कार्य दिवस में मजदूरों के खातों में भुगतान को सीधे तौर पर दिया जाना चाहिए। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संकट को कम करेगा।" उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र बदहाल है और इसे अधिक सब्सिडी व कर्जमाफी के जरिए उबारा जाना चाहिए।
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