प्रियंका गांधी भड़कीं, 'अगर चुनाव आयुक्तों को जानकारी थी और उन्होंने इजाजत दी, तो यह लोकतंत्र पर हमला'

प्रियंका गांधी ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर मुद्दा है। अगर चुनाव नहीं होंगे, तो लोकतंत्र कहां रहेगा? अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं होते और उनमें किसी भी तरह की धांधली होती है, और चुनाव आयोग उसमें मदद करता है, तो यह गंभीर बात है।

फोटो: IANS
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• वोटर लिस्ट विवाद: प्रियंका गांधी का बड़ा आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

• चुनाव आयोग पर प्रियंका गांधी का हमला, वोटर लिस्ट हेरफेर को बताया देशद्रोह

• वोटर लिस्ट में धांधली लोकतंत्र पर गंभीर हमला, जांच हो: प्रियंका गांधी

वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने बुधवार को इस मुद्दे को लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर बताया और सवाल उठाया कि अगर चुनाव निष्पक्ष रूप से नहीं होते हैं, तो इसकी क्या अहमियत है? उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयुक्तों को इस बारे में पता था और वे इसे होने दे रहे थे, तो यह लोकतंत्र पर बहुत गंभीर हमला है।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया में कथित पक्षपात और अन्याय को लेकर लगातार चिंता जताते रहे हैं। चुनाव आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने कुछ मुद्दे उठाए थे। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।


उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर मुद्दा है। अगर चुनाव नहीं होंगे, तो लोकतंत्र कहां रहेगा? अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं होते और उनमें किसी भी तरह की धांधली होती है, और चुनाव आयोग उसमें मदद करता है, तो यह गंभीर बात है। यह देशद्रोह का काम है और जो भी ऐसा कर रहा है, उसकी ठीक से जांच होनी चाहिए।

प्रियंका गांधी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर भारत ऐसे मुद्दों को हल्के में नहीं ले सकता। वर्षों और दशकों से हमारा लोकतंत्र मजबूत रहा है। हम इन मुद्दों को हल्के में नहीं ले सकते। हम अपने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, और यहां चुनाव आयोग इसे कमजोर करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है।

उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर मीडिया में जो आ रहा है वह सच है, और जिस बात का हमें लंबे समय से शक था, जिसे राहुल गांधी बार-बार उठाते रहे हैं कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं और उनमें हेरफेर हो रही है वह सच है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।


यह ताजा विवाद एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कदमों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियां कई तरह के फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं। इनमें यह आरोप भी शामिल था कि नए वोटरों को जोड़ने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने से जुड़े कुछ मामलों और मुद्दों के बारे में कमिश्नरों को अंधेरे में रखा गया था।

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