राम मंदिर चंदा चोरी: SIT आज सौंप सकती है अंतिम जांच रिपोर्ट, कुछ और लोगों की भूमिका सामने आने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने, जवाबदेही तय करने और वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। अब अंतिम रिपोर्ट आने पर सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

राम मंदिर चंदा चोरी: SIT आज सौंप सकती है अंतिम जांच रिपोर्ट, कुछ और लोगों की भूमिका सामने आने की चर्चा
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के खुलासे के बाद गठित एसआईटी आज अंतिम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। खबरों के अनुसार, लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी के मामले में कुछ और लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले का खुलासा होने के बाद चौतरफा सवाल खड़े होने पर राज्य सरकार ने 13 जून को मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था और 15 जून से जांच शुरू हुई थी। सरकार ने एसआईटी को 15 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का समय दिया था। 23 जून को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 40 दिनों के दौरान 70 बार चढ़ावा चोरी, दान राशि की गणना में अनियमितता और गणना तथा बैंक कर्मियों की मिलीभगत की बात सामने आई थी।

पहली रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे

एसआईटी ने शुरुआती जांच में यह भी पाया था कि चढ़ावे की गणना के लिए तैनात कर्मचारियों को पर्याप्त जांच के बिना प्रवेश दिया जाता था। रिपोर्ट में ट्रस्ट के तत्कालीन सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे। अब अंतिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

राम मंदिर में चंदा चोरी और व्यवस्थाओं की जांच कर रही एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, जांच में राम मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में दान और चढ़ावे की सुरक्षा से लेकर नियुक्तियों, खरीद प्रक्रिया और प्रसाद वितरण तक कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे।


चढ़ावे की सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल

जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गणना कक्ष में गिनती की प्रक्रिया और उसे मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने में पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। यह भी पाया गया कि श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का पर्याप्त दस्तावेजीकरण नहीं किया जा रहा था। कई मामलों का उल्लेख किया गया है, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली।

रिपोर्ट में मंदिर की विभिन्न नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आया कि कई पदों पर नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता मानकों के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। इससे प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही प्रभावित होने की बात कही गई है।

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प्रसाद खरीद में भी गड़बड़ी

एसआईटी ने सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। कुछ खरीद मामलों में कमीशन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होने के सबूत भी मिले हैं। इसके अलावा प्रसाद वितरण और सीता रसोई के संचालन में भी कई खामियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार दर से काफी अधिक कीमत पर की गई। इससे गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।

एसआईटी ने जांच में पाया कि गिरोह ने अविनाश शुक्ला को चोरी की मुख्य जिम्मेदारी दी थी। वह सबसे अधिक बार चोरी करते हुए कैमरे में कैद हुआ। बाकी सदस्य उसे कवर करके खड़े रहते थे। मनीष और रमाशंकर ने भी कई बार रकम पार की। अब पुलिस की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है।

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40 दिन में 70 बार चोरी हुई

जांच में पता चला कि 40 दिन में 70 बार चोरी की गई थी। सीसीटीवी फुटेज में अविनाश शुक्ला लगभग 50 बार रकम पार करते दिखाई दिया। फुटेज रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि अविनाश ही अधिकांश रकम पार करता था। रिमांड पर पूछताछ में अविनाश ने बताया कि उसे ही अक्सर रकम पार करने की जिम्मेदारी दी जाती थी। वह आसानी से रकम लेकर निकल जाता था।

यह भी पाया गया कि टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव पर चोरी की निगरानी का काम था। उनका काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी की नजर चोरों पर न पड़े। रकम कब और कैसे पार करनी है, यह अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तय करते थे। उसके बाद अविनाश, मनीष और रमाशंकर रुपये पार करते थे।

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अनुकल्प और लवकुश की मुख्य भूमिका

एसआईटी जांच में अनुकल्प की मुख्य भूमिका सामने आई थी। पुलिस जांच में भी ऐसे ही साक्ष्य मिल रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट है कि आरोपियों ने लगभग हर दिन दो बार रकम पार की। अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने रिमांड पर बताया कि वे अक्सर दो बार ही रकम पार करते थे। कभी-कभी वे तीन बार भी हाथ साफ करते थे। यह खेल तब से चल रहा था जब से ये सभी काम पर लगाए गए थे।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने, जवाबदेही तय करने और वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। अब अंतिम रिपोर्ट आने पर सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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