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...इस बेताबी का अगला क़दम सैलाब होता है, किसी को ये कोई कैसे बताए: जावेद अख्तर की नज़्म ‘नया हुक्मनामा’

कहवा खाना

...इस बेताबी का अगला क़दम सैलाब होता है, किसी को ये कोई कैसे बताए: जावेद अख्तर की नज़्म ‘नया हुक्मनामा’

लोकतंत्र को चुनावी राजनीति की बैसाखी नहीं, देश का प्राण तत्व समझते थे नेहरू

देश

लोकतंत्र को चुनावी राजनीति की बैसाखी नहीं, देश का प्राण तत्व समझते थे नेहरू