राहुल द्रविड़ के भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद तत्कालीन कप्तान रोहित शर्मा ने बताया था कि कैसे उनकी पत्नी इस दिग्गज को ‘मैदान पर उनकी पत्नी’ मानती थी।
जब कोई उनके टी20 उत्तराधिकारी सूर्यकुमार यादव को मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर के बारे में बात करते हुए देखता है तो यह समीकरण उतना ही सहज और आपसी भरोसे तथा सम्मान पर बना हुआ लगता है जितना रोहित और द्रविड़ के बीच था।
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जब सूर्यकुमार से गंभीर के साथ उनके रिश्ते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मैंने गौतम भाई के साथ चार साल (कोलकाता नाइट राइडर्स में) क्रिकेट खेला है और मुझे पता था कि वह कैसे सोचते हैं। वह दो कदम उठाएंगे, मैं दो कदम उठाऊंगा और हम बीच में कहीं मिलेंगे।’’
सूर्यकुमार ने कहा कि इन दो वर्षों में दोनों के बीच कभी कोई बहस नहीं हुई और उन्होंने एक आदर्श एकादश तय करने के लिए कभी रातों की नींद नहीं गंवाई।
सूर्यकुमार ने कहा, ‘‘जब से हमने साथ काम करना शुरू किया, जब हम श्रीलंका गए थे, तब से लेकर अब तक मुझे याद नहीं कि कभी किसी खिलाड़ी को लेकर हमारी बहस हुई हो।’’
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कप्तान ने कहा, ‘‘हम बात करते हैं कि हमें किसी खास खिलाड़ी को खिलाना चाहिए या नहीं। हम दोनों हमेशा टीम को जिताने में दिलचस्पी रखते हैं। हम किसी खिलाड़ी को ऐसी स्थिति में कैसे रख सकते हैं जिससे टीम को फायदा हो सके।’’
सूर्यकुमार की अगुआई में भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर 2024 में जीते टी20 विश्व कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया।
सूर्यकुमार के मुताबिक कभी-कभी अपने काम करने के तरीकों से जान-पहचान होने से लंबे समय का खाका तैयार करने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे शुरू से ही पता था कि हमारी एक-दूसरे से क्या उम्मीदें होंगी। कई बार हमने टीम के बारे में एकादश या 15 खिलाड़ियों के बारे में बात की है कि हमें किसे चुनना है और 14 खिलाड़ी हमेशा एक जैसे रहे हैं।’’
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सूर्यकुमार ने कहा,‘‘अगर सफलता की दर इतनी अधिक है तो हमें इस पर अधिक बात करने की जरूरत नहीं है। हमारा लक्ष्य मिलकर कुछ अच्छा हासिल करना था।’’
भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘इसलिए हम किसी भी चयन के फैसले को लेकर सहज थे। अगर आप विश्व कप जीतना चाहते हैं तो दोनों का किसी चीज पर सहमत होना बहुत जरूरी है।’’
सूर्यकुमार की कप्तानी रोहित से काफी प्रेरित लगती है जिन्होंने मुश्किल हालात में सहारा बनकर सम्मान कमाया।
सूर्यकुमार ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुश्किल दौर का सामना कर रहे खिलाड़ी का हौसला बढ़ाना बहुत जरूरी है और दोनों ने मुश्किल दौर से उबरकर टूर्नामेंट में अहम मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया।
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उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई अच्छा नहीं कर रहा होता तो आप उसके साथ समय बिताने की कोशिश करते हैं। उसे डिनर पर ले जाते हैं, उससे बात करते हैं क्योंकि ये ऐसे खिलाड़ी हैं जो सही समय पर आपके लिए कुछ खास करेंगे जैसा अभिषेक ने अभी किया और संजू ने पिछले तीन मैच में किया।’’
सूर्यकुमार ने कहा, ‘‘अपनी भूमिका निभाना, अपनी जिम्मेदारियों को समझना, सही समय पर मदद करना, जब कोई अच्छा नहीं कर रहा हो तो खिलाड़ी से बात करना। ये मेरे लिए ज्यादा जरूरी है। इसलिए ये सभी चीजें मेरे लिए काफी मायने रखती हैं।’’
उन्होंने एक बार फिर ‘बोलने की आजादी’ पर जोर दिया जो उनका ड्रेसिंग रूम मंत्र है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि ड्रेसिंग रूम में बोलने की आजादी बहुत जरूरी है। अगर आप सभी की बात नहीं सुनते हैं तो आप सभी को साथ लेकर ट्रॉफी नहीं जीत सकते।’’
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सूर्यकुमार को लगता है कि सभी को यह समझने की जरूरत है कि किसी भी दूसरे खेल की तरह इसमें सफलता से अधिक असफलताएं होंगी लेकिन कोशिश में अंदर की ईमानदारी ही लोगों को आगे बढ़ाएगी।
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