
T20 विश्व कप 2026 का दूसरा सेमीफाइनल शाम 7 बजे से मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां भारत और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे। फाइनल में जगह पक्की करने के लिए दोनों टीमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।
टूर्नामेंट में अब तक दोनों का सफर प्रभावशाली रहा है। भारतीय टीम को सुपर-8 में सिर्फ दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, जबकि इंग्लैंड की एकमात्र हार ग्रुप स्टेज में वेस्टइंडीज के खिलाफ आई थी। इसके अलावा दोनों टीमों ने लगातार दमदार खेल दिखाया है।
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भारतीय बल्लेबाजी क्रम अब तक पूरी तरह एकजुट नजर नहीं आया है, लेकिन हर मैच में किसी न किसी खिलाड़ी ने जिम्मेदारी संभालकर टीम को जीत दिलाई है। वेस्टइंडीज के खिलाफ संजू सैमसन की अहम पारी इसका उदाहरण है। हालांकि पिछले दो मुकाबलों में वरुण चक्रवर्ती की स्पिन अपेक्षित असर नहीं छोड़ सकी है।
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में अभिषेक शर्मा, ईशान और सूर्यकुमार यादव जैसे शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को बड़ी और प्रभावशाली पारी खेलनी होगी। मध्यक्रम में शिवम दुबे, हार्दिक पांड्या और तिलक वर्मा से भी अहम योगदान की उम्मीद रहेगी। साथ ही, स्पिन गेंदबाजी और फील्डिंग में सुधार करना टीम इंडिया के लिए जरूरी होगा।
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इंग्लैंड की टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत नेपाल के खिलाफ करीबी जीत से की थी, लेकिन इसके बाद उसने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और सुपर-8 में अजेय रहते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई। फिल साल्ट और जोस बटलर की सलामी जोड़ी अब तक बड़ी शुरुआत देने में सफल नहीं रही है, जो इंग्लैंड के लिए चिंता का विषय है। हालांकि मध्यक्रम में हैरी ब्रूक और विल जैक्स ने टीम को मजबूती दी है। गेंदबाजी विभाग भी संतुलित नजर आ रहा है।
टी20 विश्व कप के इतिहास में यह तीसरी लगातार बार है जब भारत और इंग्लैंड सेमीफाइनल में भिड़ रहे हैं। 2022 में इंग्लैंड ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 में भारत ने बाजी मारी थी। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही मौकों पर सेमीफाइनल जीतने वाली टीम ने खिताब भी अपने नाम किया था।
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हेड-टू-हेड आंकड़ों की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक 29 टी20 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें भारत ने 17 और इंग्लैंड ने 12 मैच जीते हैं। आंकड़े भले भारत के पक्ष में हों, लेकिन सेमीफाइनल का दबाव अलग ही होता है।
वानखेड़े की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। ऐसे में दोनों टीमों के ओपनर्स की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। जो टीम बेहतर शुरुआत करेगी, उसके फाइनल में पहुंचने की संभावना मजबूत होगी। घरेलू दर्शकों का समर्थन भारतीय टीम के मनोबल को और बढ़ा सकता है।
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