अपराध

दिल्ली ब्लास्ट केस में फंसाने की धमकी देकर बड़ा फ्रॉड, रिटायर्ड मैनेजर को 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा, 40.90 लाख ठगे

ठगों ने पीड़ित को बताया कि उनके आधार और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर कर्नाटक में एक बैंक खाता खोला गया है, जिसमें 2.65 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की धमकी दी गई।

दिल्ली ब्लास्ट केस में फंसाने की धमकी देकर साइबर ठगों ने किया बड़ा फ्रॉड
दिल्ली ब्लास्ट केस में फंसाने की धमकी देकर साइबर ठगों ने किया बड़ा फ्रॉड फोटोः IANS

देश में 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर क्राइम के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसे लोगों ने डर की वजह से कई दिनों तक छिपाए रखा। पुलिस तक पहुंचने में देरी की वजह से भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। साइबर अपराधी सबसे ज्यादा वृद्धि और सेवानिवृत्त लोगों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला मुंबई के भांडुप इलाके का है। यहां साइबर ठगी का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां ठगों ने दिल्ली बम धमाके और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को पूरे 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और उनसे 40.90 लाख रुपये ठग लिए। मामले की शिकायत मिलने के बाद मुंबई साइबर सेल जांच में जुट गई है।

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पीड़ित राजेंद्र (जो महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में मैनेजर पद से रिटायर हैं) को 10 मार्च को सिग्नल ऐप पर 'एटीएस डिपार्टमेंट' नाम के अकाउंट से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एटीएस का अधिकारी 'पीएसआई सिंह' बताया और दावा किया कि जनवरी में हुए दिल्ली बम धमाके और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनका नाम सामने आया है।

ठगों ने पीड़ित को बताया कि उनके आधार और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर कर्नाटक में एक बैंक खाता खोला गया है, जिसमें 2.65 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की धमकी दी गई।

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डर का माहौल बनाकर ठगों ने पीड़ित को घर में अलग कमरे में रहने, किसी से बात न करने और लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया। मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने पहले 2.90 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठगों ने उन्हें शेयर बाजार में लगे 29 लाख रुपये के निवेश को बेचने के लिए मजबूर किया, जिसमें से 28 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।

इतना ही नहीं, ठगों ने 'बेल सिक्योरिटी' के नाम पर 10 लाख रुपये और वसूल लिए, जो पीड़ित की पत्नी ने लोन लेकर दिए। ठगों ने भरोसा दिलाया कि पूरी रकम दो दिनों में वापस कर दी जाएगी और मामला खत्म हो जाएगा लेकिन पैसे मिलते ही उन्होंने संपर्क तोड़ लिया।

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कई दिनों तक इंतजार के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने 3 मई को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और 4 मई को साइबर सेल में औपचारिक शिकायत दी।

मुंबई पुलिस के अनुसार, यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए साइबर अपराध के खतरनाक ट्रेंड को दिखाता है, जहां ठग सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर लोगों को मानसिक रूप से दबाव में डालते हैं और बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं।

फिलहाल, साइबर सेल संबंधित बैंक खातों की जांच कर रही है, और आरोपियों की पहचान करने की कोशिश जारी है।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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