
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भारत के वृद्धि दर अनुमान को संशोधित कर वित्त वर्ष 2019-2020 के लिए 5.1 फीसदी कर दिया है। इससे पहले एडीबी ने 6.5 फीसदी का अनुमान जाहिर किया था। इसके अलावा, उसने अगले वित्त वर्ष 2020-21 के अनुमान को 7.2 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया।
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एडीबी ने एक बयान में कहा, “भारत में वृद्धि कम हुई है, ऐसा क्रेडिट की कमी और घरेलू मांग के कमजोर होने से हुआ है।” यह चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक अनुमान के नीचे जाने का एक और संशोधन है।
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केंद्रीय बैंक ने कहा कि जुलाई-सितंबर की जीडीपी वृद्धि, अनुमान से काफी कम हो गई है और विभिन्न संकेतक बताते हैं कि घरेलू और बाहरी मांग की स्थिति कमजोर बनी हुई है। दूसरी तिमाही में विकास दर छह साल के निचले स्तर 4.5 फीसदी पर आ गई।
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इससे पहले इस महीने की शुरुआत में ही क्रिसिल रेटिंग ने वित्त वर्ष 2020 के लिए भारत के जीडीपी वृद्धि दर अनुमान को 6.3 प्रतिशत से घटाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। इसके अलावा 5 दिसंबर को भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान देश की जीडीपी बढ़त के अनुमान को 6.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया।
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इन सबके बीच चिंताजनक बात ये भी है कि देश के घरेलू खपत में भी लगातार चिंताजनक गिरावट दर्ज की जा रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति औऱ खराब है। वित्ती वर्ष 2019-20 की शुरुआत से ही ग्रामीण इलाकों में मांग में भारी कमी जारी है, जो अब और बदतर होती जा रही है। सरकार के लाख दावों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू वस्तुओं, ट्रैक्टर, दोपहिया वाहनों आदि की मांग में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है।
(आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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