
केंद्रीय बजट 2026-27 पर दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ संगठनों ने इसे 'दूरदर्शी और समावेशी' करार दिया, जबकि अन्य ने प्रमुख क्षेत्रों के लिए अवसरों की कमी और कुछ चिंताओं की ओर इशारा किया।
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चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने बजट को मिला-जुला बताया। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बजट को "खुशी और गम का मिश्रण" करार देते हुए कहा कि "आयकर स्लैब के संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई।"
एमएसएमई के लिए प्रस्तावित 10,000 करोड़ रुपये के कोष का स्वागत करते हुए गोयल ने कहा कि यह एक अच्छा कदम है, लेकिन भारत के व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विनिर्माण क्षेत्र के लिए कुछ भी विशेष नहीं किया गया है।
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उन्होंने उच्च प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शेयर बाजार में निवेश करने वाले 15 करोड़ भारतीयों के लिए यह अच्छा कदम नहीं है। गोयल ने कहा कि दिल्ली का व्यापारिक समुदाय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है क्योंकि "दिल्ली के व्यापार और उद्योगों के लिए एक भी घोषणा नहीं की गई है, जबकि दिल्ली के व्यापारी अरबों रुपये का जीएसटी और आयकर चुकाते हैं।"
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कृषि के मोर्चे पर, व्यापारिक संघों ने कहा कि बजट की घोषणाएं किसानों और एमएसएमई उद्योगों को बढ़ने में मदद करेंगी।
एग्रीप्रिन्योर उक्रांति फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि किसानों के लिए समर्पित अनुसंधान कार्यक्रमों से उनकी आय में वृद्धि होने और जोखिम कम होने की संभावना है।
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दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष ग्रोवर ने कहा कि बजट में दवाओं की कीमतों में बहुप्रतीक्षित राहत दी गई है। ग्रोवर ने कहा, ‘‘कैंसर रोगियों के लिए हाई-एंड दवाओं की कीमतें, चाहे वे जेनेरिक हों या पेटेंट, कम कर दी गई हैं, इससे सभी को लाभ होगा।’’
कंप्यूटर मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (सीएमडीए) दिल्ली के अध्यक्ष पुनीत सिंघल ने कहा कि कुल मिलाकर बजट सकारात्मक है और इससे विकास होगा।
उन्होंने कहा, "आईटी सेवाओं के लिए विकास की काफी संभावनाएं हैं, क्लाउड सेवाएं स्थापित करने के लिए दिए गए प्रोत्साहन एक स्वागत योग्य कदम है और इसके परिणामस्वरूप रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।"
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