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अर्थतंत्र की खबरें: सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट और शेयर बाजार हरे निशान में बंद, इस सेक्टर में खरीदारी

शुक्रवार को एमसीएक्स और वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई। इसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना रहा।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को चांदी की कीमत लगातार छठे दिन रिकॉर्ड तेजी के साथ 3,600 रुपये उछलकर 2,92,600 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। स्टॉकिस्टों की लगातार लिवाली के बीच चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी है।

हालांकि, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से नीचे आ गया और 1,100 रुपये घटकर 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रहा। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम था। बृहस्पतिवार को चांदी 2,89,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

कारोबारियों ने कहा कि कमजोर वैश्विक रुख के बावजूद लगातार औद्योगिक उठाव के कारण चांदी मजबूत बनी हुई। चांदी अब सिर्फ छह सत्रों में 20.16 प्रतिशत यानी 49,100 रुपये चढ़ चुकी है। आठ जनवरी को इसकी कीमत 2,43,500 रुपये प्रति किलोग्राम थी। चांदी लगातार दूसरे साल सोने से आगे रही और अबतक इसने 22.4 प्रतिशत का लाभ दिया है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना और चांदी में लगातार दूसरे दिन गिरावट जारी रही। मजबूत डॉलर और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से कीमतों में गिरावट आई।

हाजिर सोना 12.46 डॉलर या 0.27 प्रतिशत घटकर 4,603.51 डॉलर प्रति औंस रहा।

मिराए एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख, प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘हाजिर सोना 0.25 प्रतिशत घटकर लगभग 4,606 डॉलर प्रति औंस पर रहा। ईरान पर अमेरिकी हमले के टल जाने से सोने की कीमतों पर दबाव रहा।’’

शुक्रवार को हाजिर चांदी 2.26 प्रतिशत यानी 2.08 डॉलर घटकर 90.33 डॉलर प्रति औंस रही थी।

पिछले कारोबारी सत्र में, चांदी 93.57 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गयी थी लेकिन अमेरिकी प्रशासन के चांदी और दूसरे जरूरी धातुओं पर आयात कर लगाने से बचने के बाद यह लगभग आठ प्रतिशत टूटकर 86.30 डॉलर प्रति औंस के दिन के निचले स्तर पर आ गयी।

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भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद, आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 187.64 अंक या 0.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 83,570.35 और निफ्टी 28.75 अंक या 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,694.35 पर था।

आईटी और बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी का नेतृत्व किया। निफ्टी बैंक 515 अंक या 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60,095.15 पर था। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1,263.95 अंक या 3.34 प्रतिशत बढ़कर 39,086.65 पर था।

इसके अलावा, सर्विसेज, रियल्टी, ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और कमोडिटी इंडेक्स में तेजी थी। दूसरी तरफ फार्मा, हेल्थकेयर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एनर्जी, कंजप्शन और मेटल लाल निशान में थे।

मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 97.30 अंक या 0.16 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,867.80 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 48.55 अंक या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,362.30 पर था।

सेंसेक्स पैक में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, एमएंडएम, एचयूएल और बजाज फिनसर्व गेनर्स थे। इटरनल, एशियन पेंट्स, बीईएल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, टाइटन, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील और आईसीआईसीआई बैंक लूजर्स थे।

एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स के प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का सत्र उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इन्फोसिस और टेक महिंद्रा में तेजी के कारण आईटी शेयरों में तेजी देखी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए 25,600 से 25,550 का इलाका एक मजबूत सपोर्ट जोन है। अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे फिसलता है, तो यह 25,400 तक जा सकता है। तेजी की स्थिति में 25,850-25,900 का स्तर एक मजबूत रुकावट जोन है।

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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हुआ

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हो गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को दी गई।

आरबीआई ने कहा कि 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के अहम घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.56 बिलियन डॉलर बढ़कर 112.83 बिलियन डॉलर हो गई है।

गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की एक वजह सोने की कीमतों का तेजी के बढ़ना है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का दाम बीते एक हफ्ते में करीब 2.5 प्रतिशत और पिछले एक महीने में करीब 5.5 प्रतिशत बढ़ चुका है।

विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 1.12 बिलियन डॉलर कम होकर 550.86 बिलियन डॉलर रह गई है।

एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की अन्य बड़ी करेंसी जैसे येन, यूरो और पाउंड शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में व्यक्त किया जाता है।

आरबीआई के मुताबिक, 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 39 मिलियन डॉलर कम होकर 18.73 बिलियन डॉलर हो गई है। आईएमएफ में रिसर्व पॉजिशन की वैल्यू 13 मिलियन डॉलर कम होकर 4.758 बिलियन डॉलर हो गई है।

किसी भी देश की लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है। इससे अलावा यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है।

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रुपया 50 पैसे टूटकर 90.84 प्रति डॉलर पर बंद

रुपये में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट आई और यह 50 पैसे टूटकर 90.84 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पूंजी की निरंतर निकसी से घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अस्थिर वैश्विक रुख और अमेरिकी मुद्रा में मजबूती ने विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी को तेज कर दिया जबकि घरेलू निवेशकों ने निचले मूल्य पर शेयरों की खरीद की।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.37 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान 90.89 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया। अंत में यह डॉलर के मुकाबले 90.84 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो बुधवार को बंद भाव से 50 पैसे की गिरावट है। रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.34 पर बंद हुआ था।

मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के अवकाश के मद्देनजर बृहस्पतिवार को विदेशी मुद्रा बाजार बंद थे। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और डॉलर के मजबूत होने से रुपया लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में टूटा।

चौधरी ने कहा, ‘‘ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर अनिश्चितता के बीच रुपये में गिरावट का अनुमान है। मजबूत डॉलर, पूंजी बाजारों से विदेशी निवेशकों की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये पर दबाव डाल सकती हैं।’’

उन्होंने अनुमान लगाया कि डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 90.50 से 91.25 के दायरे में रह सकता है।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.26 पर रहा।

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