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अर्थतंत्र की खबरें: भारतीय शेयर बाजार बड़ी तेजी के साथ बंद और चांदी में गिरावट का दौर जारी

तेल और गैस, बैंक और वाहन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी आने से बीएसई सेंसेक्स 943 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी में 263 अंक की तेजी दर्ज की गई।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

आम बजट के दिन भारी गिरावट का सामना करने वाले घरेलू शेयर बाजार ने सोमवार को जोरदार वापसी की। तेल एवं गैस, बैंक और वाहन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी आने से बीएसई सेंसेक्स 943 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी में 263 अंक की तेजी दर्ज की गई।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 943.52 अंक यानी 1.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 81,666.46 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,009.31 अंक चढ़कर 81,732.25 अंक के उच्चस्तर तक पहुंच गया था।

वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 262.95 अंक यानी 1.06 प्रतिशत बढ़कर 25,088.40 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 282.65 अंक चढ़कर 25,108.10 अंक तक पहुंच गया था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज गिरावट और बजट के दिन की भारी गिरावट से प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मूल्य-आधारित खरीदारी आने से घरेलू शेयर बाजारों को राहत मिली।

सेंसेक्स की कंपनियों में से पावर ग्रिड में 7.61 प्रतिशत और अदाणी पोर्ट्स में 4.76 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

इनके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, इंटरग्लोब एविएशन (यानी इंडिगो), आईसीआईसीआई बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट भी प्रमुख रूप से लाभ में रहीं।

दूसरी तरफ एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, ट्रेंट और टाइटन के शेयर नुकसान के साथ बंद हुए।

क्षेत्रवार सूचकांकों में उपयोगिता खंड में सर्वाधिक 2.66 प्रतिशत की तेजी रही जबकि बिजली खंड में 2.54 प्रतिशत, सेवा खंड में 2.38 प्रतिशत और ऊर्जा खंड में 1.98 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

जनवरी महीने में विनिर्माण गतिविधियों में हल्के सुधार के आंकड़ों ने भी बाजार धारणा को समर्थन दिया। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) दिसंबर के दो साल के निचले स्तर 55 से बढ़कर जनवरी में 55.4 रहा।

हालांकि, कारोबारी भरोसा साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई।

इससे पहले, रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के दिन प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में बढ़ोतरी के प्रस्ताव से शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई थी। सेंसेक्स 1,546.84 अंक यानी 1.88 प्रतिशत टूटकर 80,722.94 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 495.20 अंक यानी 1.96 प्रतिशत गिरकर 24,825.45 अंक पर रहा था।

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कीमती धातुओं में गिरावट का दौर जारी, चांदी में 23,900 रुपए की गिरावट तो सोना 5,700 रुपए हुआ सस्ता

सर्राफा बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। बजट में सोना और चांदी को लेकर कोई बड़ी या सीधी घोषणा नहीं की गई, इसके बावजूद कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं पर दबाव साफ दिखा।

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखी गई। चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 1.79 लाख तक टूट चुकी है, जबकि सोना भी फिसलकर करीब 1.37 लाख रुपए के स्तर पर आ गया है। बीते तीन दिनों से सोने-चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।

फिलहाल खबर लिखे जाने तक (सुबह 11.22 बजे) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 5,719 रुपए यानी 4.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,36,498 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 23,908 रुपए सस्ती होकर 2,41,744 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गई, जिसमें करीब 9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते सर्राफा बाजार में दबाव बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली। हालांकि, पहले 12 प्रतिशत तक गिरने के बाद चांदी 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रही। इससे पहले सत्र में चांदी ने पिछले 10 वर्षों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की थी, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई।

गिरावट के पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं। हाल ही में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं, जिसने बड़े और अनुभवी निवेशकों को भी हैरान कर दिया था। जनवरी में यह तेजी और बढ़ गई थी, जब वैश्विक तनाव, कमजोर होती मुद्राएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी का रुख किया था।

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रुपया 42 पैसे चढ़कर 91.51 प्रति डॉलर पर

आम बजट 2026-27 पेश होने के एक दिन बाद सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 42 पैसे की मजबूती के साथ 91.51 (अस्थायी) पर बंद हुआ। रुपये में यह बढ़त मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के कारण देखी गई।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को बचाने के लिए पूरी मजबूती से सक्रिय नजर आया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.95 पर खुला। कारोबार के दौरान इसने 91.45 का उच्चस्तर और 91.95 का निचला स्तर छुआ। अंत में रुपया 91.51 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर के मुकाबले 42 पैसे की बढ़त है।

इससे पहले शुक्रवार को रुपया 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, जिसके बाद यह छह पैसे की मामूली बढ़त के साथ 91.93 पर बंद हुआ था।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बजट ने रुपये को भरोसा दिया है। हालांकि, सरकार की भारी उधारी योजना (17.2 लाख करोड़ रुपये) आने वाले समय में निवेशकों की धारणा पर दबाव डाल सकती है।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.09 प्रतिशत बढ़कर 97.07 पर कारोबार कर रहा था।

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