
पश्चिम एशिया संकट जारी रहने से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के बीच घरेलू शेयर बाजार में तीन दिनों से जारी तेजी बुधवार को थम गई। सेंसेक्स में करीब 757 अंकों की गिरावट रही जबकि निफ्टी 198 अंक टूट गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी और पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अस्थिरता की आशंका से भी बाजार धारणा प्रभावित हुई।
बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 756.84 अंक यानी 0.95 प्रतिशत टूटकर 78,516.49 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 831.03 अंक तक लुढ़क गया था।
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.81 प्रतिशत गिरकर 24,378.10 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर में 10.85 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के मार्च तिमाही के नतीजे निवेशकों को प्रभावित नहीं कर सके और बिकवाली तेज हो गई।
इसके अलावा इन्फोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और आईसीआईसीआई बैंक भी नुकसान में रहे। दूसरी तरफ, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी और ट्रेंट में बढ़त दर्ज की गई।
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वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बने रहना और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर आवाजाही बंद रहना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का दाम 0.82 प्रतिशत बढ़कर 99.29 डॉलर प्रति बैरल और डबल्यूटीआई क्रूड का दाम 1.15 प्रतिशत बढ़कर 90.71 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।इससे पहले के सत्र में कच्चे तेल की कीमत में 3 प्रतिशत के आसपास की बढ़ोतरी देखी गई थी।
हालांकि, सुबह 11:21 पर भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर क्रूड ऑयल का फ्यूचर्स 1.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ 8,314 रुपए पर था।
ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा के बाद बाजार का रुख सतर्क बना रहा, क्योंकि नौसैनिक नाकाबंदी जारी है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से आवाजाही बंद है।
वहीं एक सोशल मीडिया पोस्ट में, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान 'आर्थिक रूप से ढह रहा है' और 'प्रतिदिन 50 करोड़ डॉलर का नुकसान उठा रहा है', साथ ही उन्होंने कहा कि तेहरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के लिए उत्सुक है।
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सरकार घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और पश्चिम एशिया संकट के बीच कीमतों में वृद्धि से निपटने के लिए इंडक्शन चूल्हे के महत्वपूर्ण उपकरणों पर सीमा शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रही है।
एक अधिकारी ने बताया कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इन चूल्हे को और अधिक किफायती बनाने के लिए इन पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की सिफारिश भी की है।
पश्चिम एशिया संकट ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही को बाधित कर दिया है, जिससे रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके चलते लोग इंडक्शन यानी इलेक्ट्रिक चूल्हे और इसके अनुकूल बर्तन खरीद रहे हैं।
इंडक्शन कुकटॉप क्षेत्र में मांग-आपूर्ति की चुनौतियों से निपटने और आपूर्ति एवं कीमतों को स्थिर करने के लिए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने वाणिज्य विभाग और बिजली मंत्रालय के साथ मिलकर हितधारकों के साथ परामर्श किया है।
सरकार ने इस क्षेत्र के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें कुछ बिजली उपकरणों पर अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) के कार्यान्वयन की समय सीमा को छह महीने बढ़ाकर अक्टूबर 2026 तक करना शामिल है। अनिवार्य ऊर्जा दक्षता समय सीमा को भी आगे बढ़ाया गया है।
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पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) संचालित केंद्र सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना... अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के अंशधारकों की संख्या नौ करोड़ से अधिक हो गई है।
योजना की बढ़ती पहुंच और प्रभाव के चलते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सकल नामांकन 1.35 करोड़ सदस्यों से अधिक हो गया है, जो योजना की शुरुआत के बाद से किसी एक वित्त वर्ष में दर्ज किया गया अब तक का सबसे अधिक नामांकन है।
पीएफआरडीए ने एक बयान में कहा कि सभी भारतीयों के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली स्थापित करने के लक्ष्य के साथ नौ मई, 2015 को शुरू की गई एपीवाई एक स्वैच्छिक, अंशदायी पेंशन योजना है जो मुख्य रूप से गरीबों, वंचितों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित है।
इसमें कहा गया कि पिछले एक दशक में सार्वजनिक और निजी बैंकों तथा डाक विभाग के निरंतर प्रयासों और सरकार के निरंतर सहयोग से इस योजना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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रुपये में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट आई और यह 39 पैसे टूटकर 93.83 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता से पश्चिम एशिया में संघर्ष कम होने की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। इसके साथ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भी भारतीय मुद्रा पर दबाव डाला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.69 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 93.87 के निचले स्तर तक पहुंचा। अंत में घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले 93.83 (अस्थायी) पर रही जो पिछले बंद भाव से 39 पैसे की गिरावट है।
रुपया मंगलवार को 28 पैसे की गिरावट के साथ 93.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण रुपये में गिरावट आई है। विदेशी पूंजी की निकासी के दबाव के कारण रुपये में नकारात्मक रुझान रहने का अनुमान है।
चौधरी ने कहा, ‘‘ हालांकि, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से रुपये में तेज गिरावट को रोका जा सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 93.60 से 94.20 रुपये के दायरे में रहने का अनुमान है।’’
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