
कच्चे तेल के दाम में तेजी और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बीच घरेलू शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को मिला-जुला रुख रहा। मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 114 अंक के लाभ में रहा जबकि एनएसई निफ्टी में 40 अंक की गिरावट रही।
कारोबार के अंतिम घंटे में हुई लिवाली से बीएसई सेंसेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 113.61 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,079.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह ऊंचे में 78,119.39 अंक तक गया और नीचे में 77,665.89 अंक तक आया। इस तरह कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 453.5 अंक का उतार-चढ़ाव रहा।
वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 40.10 अंक यानी 0.16 प्रतिशत टूटकर 24,395.85 अंक पर बंद हुआ। यह निफ्टी में लगातार तीसरे दिन की गिरावट है।
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, लार्सन एंड टुब्रो, हिंदुस्तान यूनिलीवर और इटर्नल के शेयर लाभ में रहे।
दूसरी ओर, नुकसान में रहने वाले शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और इन्फोसिस शामिल हैं।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के कारण निवेशकों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति सीमित बनी हुई है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.44 प्रतिशत टूटकर 87.70 डॉलर प्रति बैरल रहा।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘बाजार में मजबूती बनी हुई है, लेकिन उसे दिशा देने वाला कोई बड़ा संकेत नहीं मिल रहा है। अमेरिका की मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीद से वैश्विक निवेश माहौल बेहतर हुआ है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर जोखिम घरेलू निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं।’’
उन्होंने कहा कि ऊर्जा बाजार को लेकर स्पष्टता आने तक भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। कंपनियों के तिमाही नतीजे और शेयर विशेष से जुड़े घटनाक्रम बाजार की दिशा को प्रभावित करते रहेंगे।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 87-89 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहने से निवेशकों की धारणा कमजोर रही। पश्चिम एशिया और प्रमुख समुद्री मार्गों को लेकर लगातार बनी चिंताओं के कारण ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।’’
कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में वृद्धि के बाद जुलाई में भारत के सोने और चांदी के आयात में नरमी आई। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में सोने का आयात केवल 4.77 प्रतिशत बढ़कर 4.16 अरब डॉलर रहा, जबकि चांदी का आयात 66.1 प्रतिशत घटकर 17.16 करोड़ डॉलर रह गया।
सरकार ने 13 मई से कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था।
राष्ट्रीय राजधानी में बृहस्पतिवार को सोने की कीमत करीब 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) और चांदी की कीमत करीब 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रही।
सोने का कुल आयात वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-जुलाई अवधि में 32.41 प्रतिशत बढ़कर 15.17 अरब डॉलर हो गया, जबकि चांदी का आयात 50.81 प्रतिशत घटकर 71.84 करोड़ डॉलर रहा।
इससे पहले, अप्रैल में सोने के आयात में 81.69 प्रतिशत, मई में 34 प्रतिशत और जून में सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।
भारत में सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत स्विट्जरलैंड रहा, जिसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रही। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और दक्षिण अफ्रीका की करीब 10 प्रतिशत रही। कीमती धातुओं का भारत के कुल आयात में पांच प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। स्विट्जरलैंड से जुलाई में भारत का कुल आयात 62.26 प्रतिशत बढ़कर दो अरब डॉलर रहा।
चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। आयातित सोने का मुख्य उपयोग आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने में होता है। सोने के आयात का प्रभाव देश के चालू खाते के घाटे पर भी पड़ता है।
सोने में सात दिन से जारी तेज़ी का दौर बृहस्पतिवार को थम गया। वैश्विक बाजार में कमजोरी के रुख के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें 2,800 रुपये टूटकर 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं।
99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत बुधवार को 1,59,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी में भी भारी गिरावट देखी गई और इसकी कीमत 6,000 रुपये फिसलकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गई।
इससे पहले के सत्र में चांदी की कीमत 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
व्यापारियों ने बताया कि विदेशी सर्राफा बाजार में कमजोरी के कारण घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.43 प्रतिशत टूटकर 4,389.67 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था और हाजिर चांदी मामूली गिरावट के साथ 65.03 डॉलर प्रति औंस रह गई।
कमजोर घरेलू शेयर बाजार और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के बीच भू-राजनीतिक जोखिम बने रहने से रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे टूटकर 95.45 (अस्थायी) के स्तर पर आ गया।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने में देरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी मुद्रा की मजबूती के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर बनी हुई है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.40 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 95.35 से 95.48 के दायरे में रहा और कारोबार के अंत में 95.45 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
बुधवार को रुपया तीन पैसे की बढ़त के साथ 95.33 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिका-ईरान के बीच समझौते में देरी और डॉलर की मजबूती के कारण रुपये पर मामूली दबाव बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, बातचीत की उम्मीद फिर बनने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निचले स्तर पर रुपये को समर्थन मिल सकता है।’’
उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के किसी हस्तक्षेप से भी निचले स्तर पर रुपये को समर्थन मिल सकता है। कारोबारियों की नजर अमेरिका के उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) महंगाई और साप्ताहिक बेरोजगारी दावों के आंकड़ों पर रहेगी। डॉलर-रुपया हाजिर भाव 95.20 से 95.70 के दायरे में रह सकता है।
घरेलू मोर्चे पर जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई। रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्याज और अदरक जैसी वस्तुओं के महंगा होने से कीमतों में बढ़ोतरी हुई। खुदरा महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर रही।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.89 पर था।
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