
भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रुपया आज शुरुआती कारोबार में 20 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 95.86 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंताओं से रुपये पर भारी दबाव है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि मुद्रास्फीति की चिंताओं और वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में कमजोर रुख बना रह सकता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से भारत के कच्चे तेल आयात पर असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि से ईंधन आयात भी महंगा हो गया है।
कारोबारियों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत डॉलर और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंताओं के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिससे रुपया इस वर्ष एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। इस साल अब तक इसमें छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 95.74 पर कमजोर खुला। दिनभर उतार-चढ़ाव वाले कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 95.61 के उच्च स्तर और 95.96 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गई। अंत में रुपया 95.73 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से सात पैसे की गिरावट है।
बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.80 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था और अंत में 95.66 पर बंद हुआ था।
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वैश्विक बाजार से मिले मजबूत संकेतों के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन हरियाली देखने को मिली और बाजार हरे निशान में बंद हुआ।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 789.74 अंक या 1.06 प्रतिशत उछलकर 75,398.72 पर था, जबकि निफ्टी 50 277 अंक या 1.18 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,689.60 पर पहुंच गया।
दिन के दौरान 30 शेयरों वाले बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी50 में जोरदार उछाल देखने को मिला और इनमें 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। निफ्टी50 ने 23,530.25 पर खुलकर 23,777.20 का इंट्रा-डे हाई बनाया, तो वहीं सेंसेक्स 74,947.12 पर खुलकर 75,681.88 का दिन का उच्चतम स्तर छुआ।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 1.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी मेटल में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई। इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में एक प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
निफ्टी 50 पैक में कुल 38 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। इसमें अदाणी इंटरप्राइजेज (8.8 प्रतिशत की तेजी), सिप्ला (8.09 प्रतिशत की तेजी), भारती एयरटेल (5.2 प्रतिशत की बढ़त), इटरनल, हिंडाल्को, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, एचडीएफसी बैंक, अदाणी पोर्ट्स और मैक्स हेल्थ के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि इसके विपरीत इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, कोल इंडिया और टीसीएस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों ने एक ही सत्र में 4.3 लाख करोड़ रुपए कमाए क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के 458.6 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 462.9 लाख करोड़ रुपए हो गया।
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भारत में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी वार्षिक बिक्री में वित्त वर्ष 35 तक बढ़कर 35-40 प्रतिशत हो सकती है, जो कि फिलहाल करीब 7 प्रतिशत के आसपास है। इस दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ईवी बसों की हिस्सेदारी बढ़कर 85 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
केपीएमजी की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की वार्षिक बिक्री 35,000 से 50,000 यूनिट्स की है और अब यह इलेक्ट्रिफिकेशन के नए दौरान में प्रवेश कर रहा है। सरकारी खरीद और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश इस सेक्टर के अगले ग्रोथ फैक्टर्स होंगे।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारत में यात्रियों द्वारा तय की गई कुल दूरी का लगभग 57 प्रतिशत बसों द्वारा तय किया जाता है, ऐसे में इस क्षेत्र का इलेक्ट्रिफिकेशन देश की क्लीन मोबिलिटी और कार्बन उत्सर्जन कम करने की महत्वाकांक्षाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केपीएमजी इंडिया के ऑटोमोटिव पार्टनर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लीड रोहन राव ने कहा,“भारत में इलेक्ट्रिक बसों की ओर बदलाव अब केवल नीतिगत पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक मोबिलिटी इकोसिस्टम के लिए एक संरचनात्मक परिवर्तन का अवसर बन रहा है। सरकारी खरीद कार्यक्रमों, लागत में सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश के समर्थन से सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण ने पहले ही मजबूत गति पकड़ ली है।”
उन्होंने बताया कि आगे चलकर, घरेलू मैन्फैक्चरिंग, फाइनेंसिंग इनोवेशन, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार और परिचालन दक्षता को संयोजित करने वाले एक स्केलेबल इकोसिस्टम के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि सार्वजनिक और निजी परिवहन दोनों क्षेत्रों में सतत दीर्घकालिक विकास को समर्थन मिल सके।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में लगभग 62,000 ई-बस टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से लगभग 46,000 बसें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत आवंटित की गई हैं। मार्च 2026 तक भारतीय सड़कों पर लगभग 16,300 इलेक्ट्रिक बसें चल रही थीं, जो मजबूत गति और तैनाती संबंधी चुनौतियों दोनों को दर्शाती हैं।
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