
भारत में सोने की कुल खपत में निवेश का हिस्सा कैलेंडर वर्ष 2025 में बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया, जो वर्ष 2024 में 29 प्रतिशत था। यह बढ़ोतरी गोल्ड ईटीएफ और बार व सिक्कों की खरीद बढ़ने के कारण हुई है, जो सुरक्षित निवेश, विविधता और वैश्विक अनिश्चितता को दर्शाती है।
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक सोने की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5,000 मीट्रिक टन (एमटी) तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश की मजबूत मांग के कारण हुई, जबकि सोने की कीमतें काफी ऊंची रहीं और आर्थिक चुनौतियां भी मौजूद थीं।
केयरएज के निदेशक अखिल गोयल ने कहा कि वैश्विक तनाव, सोने की कीमतों में बढ़त और निवेश को विविध बनाने की चाह आगे भी सोने में निवेश को बढ़ावा देती रहेगी। वित्त वर्ष 2027 तक कुल सोने की खपत में निवेश का हिस्सा 35-40 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में बताया गया कि रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद भारत में ज्वेलरी की मांग मजबूत बनी हुई है। वर्ष 2025 में ज्वेलरी की खरीद करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 4.8 लाख करोड़ रुपए हो गई। वर्ष 2021 से वर्ष 2025 के बीच ज्वेलरी पर खर्च में सालाना औसत 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, लिस्टेड ज्वेलरी कंपनियों की आय वित्त वर्ष 2026 में 35 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में 20-25 प्रतिशत बढ़ सकती है। इसका कारण नए स्टोर खुलना और संगठित बाजार का तेजी से बढ़ना है।
औसत सकल लाभ मार्जिन वित्त वर्ष 2026 में 170-200 बेसिस पॉइंट बढ़ने का अनुमान है, जिसका कारण बिना हेजिंग वाले सोने के स्टॉक से मिलने वाला फायदा है।
रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025 में वैश्विक निवेश की मांग 2,175 मीट्रिक टन रही, जो वर्ष 2020 के 1,805 मीट्रिक टन के पिछले रिकॉर्ड से ज्यादा है। इसमें गोल्ड ईटीएफ में 800 मीट्रिक टन का निवेश प्रमुख रहा।
वैश्विक जोखिम और सुरक्षित निवेश की जरूरत के कारण लोगों ने अपने निवेश को विविध बनाया, जिससे सोने की मांग बढ़ी। भारत में भी पिछले दो साल में ईटीएफ में निवेश तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025 में 37.5 टन का निवेश हुआ, जो पिछले 10 साल के कुल निवेश से ज्यादा है।
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पश्चिम एशिया तनावों के बीच वैश्विक बाजारों में मजबूती और भू-राजनीतिक माहौल में सुधार और भारत-न्यूजीलैंड के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते पिछले लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में हरियाली देखने को मिली और घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 639.42 अंकों यानी 0.83 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,303.63 पर ट्रेड करते नजर आया, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 194.75 (0.81 प्रतिशत) अंकों की बढ़त के साथ 24,092.70 पर पहुंच गया।
दिन के कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 76,856.05 पर खुलकर 563.99 अंक बढ़कर 77,420.04 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 23,945.45 पर खुलकर 185.25 अंक चढ़कर 24,130.70 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.90 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.47 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा, निफ्टी मीडिया और निफ्टी मेटल में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एफएमसीजी ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स से कमजोर रहा।
निफ्टी 50 पैक में सन फार्मा, टेक महिंद्रा, विप्रो, अदाणी पोर्ट्स, एनटीपीसी, एसबीआई लाइफ, जेएसडब्ल्यू स्टील, एचसीएल टेक, एमएंडएम और टीसीएस के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई और ये टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे। जबकि श्रीराम फाइनेंस, एक्सिस बैंक, बीईएल, टाटा कंज्यूमर, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल और नेस्ले इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत न्यूजीलैंड को होने वाले 100 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर टैरिफ छूट मिलेगी। वहीं, न्यूजीलैंड से भारत आने वाले 95 प्रतिशत सामान पर टैरिफ में छूट दी गई है या फिर टैरिफ कम कर दिया गया है।
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भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 4.4 लाख यूनिट्स हो गई है और इसमें तिमाही आधार पर 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग को माना जा रहा है। यह जानकारी सोमवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में ऑटोमोबाइल की थोक बिक्री वित्त वर्ष 27 में 4-6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसे जीएसटी में कटौती और नए मॉडल के लॉन्च होने से फायदा होगा।
नए मॉडलों के लॉन्च की लगातार बढ़ती मांग और संशोधित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों के निरंतर सकारात्मक प्रभाव के चलते मार्च में खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
जीएसटी दरों में बदलाव के बाद वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में थोक बिक्री में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि दूसरी छमाही में इसमें 17 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई। खुदरा बिक्री में भी 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह अब तक के उच्चतम स्तर 46 लाख यूनिट तक पहुंच गई।
रिपोर्ट में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार खुदरा बिक्री में मजबूती के चलते इन्वेंट्री का स्तर मार्च 2026 तक घटकर लगभग 28 दिन रह गया, जबकि मार्च 2025 के अंत में यह 52-53 दिन और सितंबर 2025 में 60 दिन था।
वित्त वर्ष 2026 में यात्री वाहनों (पीवी) की कुल बिक्री में यूटिलिटी वाहनों (यूवी) का हिस्सा 68 प्रतिशत था। हालांकि यूवी वाहनों की बिक्री में सबसे अधिक हिस्सेदारी बनी हुई है, लेकिन जीएसटी दरों में कटौती के बाद मिनी, कॉम्पैक्ट और सुपर-कॉम्पैक्ट सेगमेंट में बिक्री में थोड़ी वृद्धि हुई है।
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वैश्विक संकेतों में सुधार और प्रमुख कंपनियों में खरीदारी के चलते घरेलू शेयर बाजारों में तीन दिन की गिरावट के बाद सोमवार को तेजी लौटी। सेंसेक्स 639 अंक चढ़कर बंद हुआ जबकि निफ्टी में 195 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।
विश्लेषकों के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और सन फार्मा के शेयरों में जोरदार लिवाली आने से मानक सूचकांकों में उछाल देखा गया। इसके अलावा ईरान और अमेरिका के बीच तनाव घटने के संकेतों ने भी धारणा को मजबूती दी।
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 639.42 अंक यानी 0.83 प्रतिशत उछलकर 77,303.63 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 755.83 अंक तक चढ़कर 77,420.04 के स्तर तक पहुंच गया था।
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 194.75 अंक यानी 0.81 प्रतिशत बढ़कर 24,092.70 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से सन फार्मा का शेयर करीब सात प्रतिशत तक उछल गया। सन फार्मा द्वारा अमेरिकी कंपनी ऑर्गेनॉन के अधिग्रहण के लिए 11.75 अरब डॉलर के सौदे की घोषणा के बाद इसमें तेज खरीदारी देखी गई।
इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में भी 2.88 प्रतिशत की तेजी आई। साथ ही, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे।
दूसरी तरफ, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रेंट और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को एक पैसे की मामूली बढ़त के साथ 94.15 (अस्थायी) पर बंद हुआ। वैश्विक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित होने के बावजूद रुपया बढ़त में रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि रुपया ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई की, लेकिन कुल मिलाकर रुझान नकारात्मक बना हुआ है क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने घरेलू मुद्रा की बढ़त को सीमित कर दिया है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.25 पर खुला। कारोबार के दौरान इसने डॉलर के मुकाबले 94.11 का ऊपरी स्तर और 94.28 का निचला स्तर छुआ।
रुपया अंत में 94.15 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले सिर्फ एक पैसे की बढ़त है। रुपया शुक्रवार को 15 पैसे टूटकर 94.16 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ''क्षेत्रीय मुद्राओं में तेजी के साथ रुपये ने पांच सत्रों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ दिया। हालांकि, बाजार में अभी भी आशंका का माहौल है। बाजार 94.30 के आसपास भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप और कच्चे तेल की उच्च कीमतों के लिए खुद को तैयार कर रहा है।''
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