
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के बीच घरेलू शेयर बाजार मंगलवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 778 अंक टूटकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 279 अंक गिरकर पांच महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ।
बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 74,003.82 अंक पर बंद हुआ। मजबूती के साथ खुला सेंसेक्स कारोबार के दौरान एक समय 787.73 अंक फिसलकर 73,994.03 अंक के निचले स्तर तक आ गया था।
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत गिरकर 23,118.60 अंक पर बंद हुआ। यह छह अप्रैल, 2026 के बाद निफ्टी का सबसे निचला बंद स्तर है।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर में करीब छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टाइटन, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी नुकसान में रहे।
दूसरी तरफ, एचसीएल टेक्नोलॉजीज 3.98 प्रतिशत, इन्फोसिस 3.64 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 2.31 प्रतिशत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 2.18 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.27 प्रतिशत चढ़े। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.89 प्रतिशत बढ़कर 107.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ते वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल से निवेशक धारणा प्रभावित होने के कारण घरेलू बाजार में गिरावट जारी रही।’’
उन्होंने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की इस सप्ताह होने वाली बैठकों से पहले निवेशक सतर्क रहे और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत सख्ती की बढ़ती आशंकाओं के बीच लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की चिंता बनी रही।
नायर ने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉण्ड प्रतिफल कई वर्षों के ऊंचे स्तर के करीब रहने से उभरते बाजारों की धारणा प्रभावित हुई और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने दबाव बढ़ाया।
भारत की थोक ऑटोमोबाइल बिक्री अगस्त 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। इसकी वजह जीएसटी 2.0 के आने के चलते अगस्त 2025 का छोटा आधार और अच्छी मांग थी। यह जानकारी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग (सियाम) की ओर से मंगलवार को दी गई।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बॉडी के डेटा में बताया गया कि अगस्त 2026 में यात्री वाहनों, तिपहिया और दोपहिया वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड उच्च स्तर पर रही है।
समीक्षा अवधि में यात्री वाहनों की कुल बिक्री 4,39,309 यूनिट्स रही है, जो कि सालाना आधार पर 36.5 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है। तिपहिया वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 22.8 प्रतिशत बढ़कर 93,764 यूनिट्स हो गई है। दोपहिया वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 10.5 प्रतिशत बढ़कर 20,34,698 यूनिट्स हो गई है।
सियाम के डायरेक्टर जनरल राजेश मेनन ने कहा, "भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग जबरदस्त ग्रोथ के दौर से गुजर रहा है। अगस्त 2026 में हुई ग्रोथ को पिछले साल के कम बेस का भी सहारा मिला है।"
मेनन ने कहा कि मांग का माहौल बुनियादी तौर पर मजबूत बना हुआ है। ग्राहकों का मजबूत भरोसा, ग्रामीण बाजारों की मजबूती और बेहतर होती फाइनेंसिंग की स्थितियां सभी कैटेगरी में ऑटोमोबाइल की मांग को बढ़ावा दे रही हैं।
मेनन ने कहा, "त्योहारी सीजन की मांग से भी अतिरिक्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे दूसरी तिमाही के नतीजे अच्छे रहेंगे।"
सियाम के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में पैसेंजर गाड़ियों, तिपहिया वाहनों, दोपहिया वाहनों और क्वाड्रीसाइकिल का कुल प्रोडक्शन 31,57,822 यूनिट्स रहा।
इस बीच, पिछले महीने भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने जुलाई में अब तक का सबसे अच्छा बिक्री प्रदर्शन दर्ज किया, जिसमें पैसेंजर गाड़ियों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की सप्लाई में जबरदस्त दो-अंकों की बढ़ोतरी हुई।
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को कमजोर वैश्विक रुख और मजबूत डॉलर के बीच सोने की कीमतें 1,000 रुपये टूटकर 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रह गईं, जो एक महीने से ज्यादा का निचला स्तर है।
यह कीमती धातु इससे पहले सात अगस्त को इसी स्तर के आसपास कारोबार कर रही थी, जब स्थानीय बाजार में इसकी कीमत 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी।
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, चांदी की कीमतें लगातार दूसरे दिन 2,34,600 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर स्थिर रहीं।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘मंगलवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सोने की कीमतों में गिरावट आई। हाजिर सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गया और एक महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है।’’
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 38 पैसे लुढ़ककर 95.92 (अस्थायी) पर रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और ब्रेंट कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से घरेलू मुद्रा पर दबाव है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि तेल आयातकों की ओर से डॉलर की बढ़ती मांग ने भारत के बाहरी संतुलन और मुद्रास्फीति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इसके अलावा घरेलू बाजारों में कमजोरी, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और वैश्विक बॉण्ड पर प्रतिफल बढ़ने की वजह से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.84 प्रति डॉलर पर खुला। इसके बाद इसमें गिरावट आई और 95.92 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पिछले बंद भाव से 38 पैसे की गिरावट है।
रुपया शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 95.54 पर बंद हुआ था। गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार को विदेशी मुद्रा और शेयर बाजार बंद थे।
व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगाए जाने वाले शुल्क पर बैंकों, सेवा प्रदाताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की एक समिति जल्द फैसला करेगी।यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी में भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) सहित 22 सदस्य शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह समिति आत्मनिर्भरता और बाजार विस्तार सहित विभिन्न कारकों के आधार पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर व्यापारी छूट दर (एमडीआर) तय करने पर जल्द निर्णय लेगी। उदाहरण के लिए, ब्राजील की 'पिक्स' व्यवस्था में व्यापारी शुल्क लगभग 0.33 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह शुल्क 0.40 प्रतिशत है।
सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि ग्राहकों से व्यापारियों को रुपे डेबिट कार्ड सहित 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा, व्यक्तियों के बीच होने वाले सभी यूपीआई लेनदेन भी पहले की तरह मुफ्त बने रहेंगे।
सरकार ने 14 सितंबर को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में कहा कि कोई भी बैंक या प्रणाली प्रदाता रुपे डेबिट कार्ड या 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन के जरिये भुगतान करने या पाने वाले किसी भी व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगाएगा।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को यूपीआई लेनदेन पर जारी अधिसूचना को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उसने ऐसे लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता चुपचाप साफ कर दिया है।
यह अधिसूचना भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन के बाद आई है, जो यूपीआई और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के जरिये होने वाले भुगतान पर एमडीआर लगाने के लिए एक सक्षम ढांचा प्रदान करती है। यह संशोधन विधेयक इसी साल अगस्त में मानसून सत्र के दौरान संसद द्वारा पारित किया गया था।
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