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अर्थतंत्र की खबरें: थोक महंगाई 12 महीने में सबसे ज्यादा और शेयर बाजार में 3 दिन से जारी गिरावट थमी

दाल, आलू, मछली जैसे खाने के सामान और अन्य वस्तुओं के दाम में तेजी से थोक मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 11 महीने के उच्चतम स्तर 2.13 प्रतिशत पर रही।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

स्थानीय शेयर बाजारों में सोमवार को पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर विराम लगा और बीएसई सेंसेक्स 939 अंक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 23,400 अंक के पार निकल गया। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में निचले स्तर पर लिवाली से बाजार को समर्थन मिला।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 938.93 अंक यानी 1.26 प्रतिशत बढ़कर 75,502.85 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह ऊंचे में 75,805.27 अंक तक गया और नीचे में 73,949.76 अंक तक आया।

वहीं 50 शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 257.70 अंक यानी 1.11 प्रतिशत चढ़कर 23,408.80 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में शामिल शेयरों में से अल्ट्राटेक सीमेंट में सबसे ज्यादा 4.22 प्रतिशत की तेजी आई। इसके अलावा ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इटर्नल, बजाज फाइनेंस, आईटीसी, टाटा स्टील और भारतीय स्टेट बैंक प्रमुख रूप से लाभ में रहे।

दूसरी तरफ, नुकसान में रहने वाले शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सन फार्मा, पावर ग्रिड और भारती एयरटेल शामिल हैं।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘ बाजार में कारोबार समाप्त होने से पहले तेजी आई। वाहन, बैंक और दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में निचले भाव पर लिवाली से बाजार बढ़त में रहा...।’’

नायर ने कहा, ‘‘निकट भविष्य में निवेशकों का रुख होर्मुज जलडमरूमध्य में होने वाले घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। आपूर्ति श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव कम होने से बाजार को और समर्थन मिल सकता है।’’

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थोक महंगाई फरवरी में बढ़कर 11 महीने के उच्चतम स्तर 2.13 प्रतिशत पर

दाल, आलू, मछली जैसे खाने के सामान और अन्य वस्तुओं के दाम में तेजी से थोक मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 11 महीने के उच्चतम स्तर 2.13 प्रतिशत पर रही। हालांकि, मासिक आधार पर इस दौरान सब्जियों की कीमतों में नरमी आई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

यह लगातार चौथा महीना है जब थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में तेजी आई है। यह इस साल जनवरी में 1.81 प्रतिशत जबकि पिछले साल फरवरी में 2.45 प्रतिशत थी।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जारी रहती है, तो थोक महंगाई में और तेजी आ सकती है और इसका असर अन्य वस्तुओं (उर्वरक, एल्युमीनियम) पर भी पड़ेगा। इसका कारण यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की तुलना में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अधिक करीब है।

डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खाद्य पदार्थों की महंगाई 2.19 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 1.55 प्रतिशत थी।

हालांकि, सब्जियों की महंगाई फरवरी में घटकर 4.73 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में यह 6.78 प्रतिशत थी। लेकिन दाल, आलू, अंडे, मांस और मछली की मुद्रास्फीति में फरवरी में वृद्धि देखी गई।

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देश में बेरोजगारी दर फरवरी में मामूली घटकर 4.9 प्रतिशत: सरकारी सर्वेक्षण

देश में 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों के बीच कुल बेरोजगारी दर फरवरी में मासिक आधार पर मामूली घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई। यह जनवरी में पांच प्रतिशत थी। सोमवार को जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) से यह जानकारी मिली।

सर्वेक्षण के अनुसार, जनवरी, 2026 में बढ़ोतरी के बाद शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों के बीच बेरोजगारी दर फरवरी, 2026 में घटकर 6.6 प्रतिशत रह गई, जो दिसंबर, 2025 के 6.7 प्रतिशत के स्तर से भी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बेरोजगारी दर फरवरी, 2026 में 4.2 प्रतिशत पर स्थिर रही।

फरवरी, 2026 में 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु की महिलाओं में कुल बेरोजगारी दर घटकर 5.1 प्रतिशत रह गई जबकि जनवरी, 2026 में यह 5.6 प्रतिशत थी। ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में गिरावट देखी गई।

शहरी महिलाओं की बेरोजगारी दर जनवरी, 2026 के 9.8 प्रतिशत से घटकर फरवरी, 2026 में 8.7 प्रतिशत रह गई, जबकि ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर इसी अवधि में 4.3 प्रतिशत से घटकर चार प्रतिशत हो गई। पुरुषों में कुल बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत पर स्थिर रही।

सर्वेक्षण के अनुसार, 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों में समग्र श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर) फरवरी, 2026 में 55.9 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रही जो जनवरी 2026 के बराबर है।

ग्रामीण क्षेत्रों में एलएफपीआर फरवरी, 2026 में 58.7 प्रतिशत रही जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 50.4 प्रतिशत आंकी गई जो जनवरी, 2026 के 50.3 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है।

वहीं 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु की महिलाओं में एलएफपीआर जनवरी, 2026 के 35.1 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी, 2026 में 35.3 प्रतिशत हो गई।

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रुपया 10 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 92.40 प्रति डॉलर पर

अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया सोमवार को 10 पैसे टूटकर 92.40 (अस्थायी) प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार धन निकासी से घरेलू मुद्रा में यह गिरावट आई।

हालांकि, विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीद और घरेलू शेयर बाजारों में तेजी ने रुपये में बड़ी गिरावट को रोक लिया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 92.44 पर खुला और कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 92.47 के अपने अब तक के दिन के कारोबार के सबसे निचले स्तर तक गिर गया।सत्र के अंत में यह 92.40 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से 10 पैसे की गिरावट है।

इससे पिछले सत्र में भी रुपया 92.47 के निचले स्तर पर पहुंचा था और शुक्रवार को 92.30 पर बंद हुआ था, जो उस समय का रिकॉर्ड निचला स्तर था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि अमेरिकी डॉलर सूचकांक में हल्की कमजोरी और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीद से रुपये की गिरावट कुछ हद तक थमी।

वहीं इंडसइंड सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक जिगर त्रिवेदी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बना रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘कच्चे तेल के ऊंचे दामों के कारण आयातकों को ज्यादा डॉलर खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ रहा है और व्यापार की शर्तों पर दबाव पड़ रहा है।’’

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मुद्रा को स्थिर रखने और अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया है।

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